सुन्नी वक्फ बोर्ड की जमीन होने के कारण इस पर बोर्ड के लोगों से बात की गई। हमने लोगों से फतवा मांगा, शहर के मानिंद लोगों की भी राय ली। दोनों बातें हमारे पक्ष में रहीं। इस मामले में धर्मगुरुओं की भी राय ली गई तो उन्होंने भी जमीन विनिमय करने की सलाह दी। दो साल से बात चल रही थी।
लगभग पांच महीने पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड से भी इसकी अनुमति मिल गई थी। इसके बाद शासन से मंजूरी आने में समय लग गया। वहां से मंजूरी मिलने के बाद आठ जुलाई को रजिस्टर्ड एग्रीमेंट हो गया। वैसे यह जमीन मस्जिद का हिस्सा नहीं है। यह वक्फ बोर्ड की जमीन है और इसका मस्जिद से कोई ताल्लुक नहीं है।
श्री काशी विश्वनाथ धाम के लिए अंजुमन इंतेजामिया कमेटी ने 17 सौ वर्ग फीट जमीन दी है। वहीं बदले में कमेटी को एक हजार वर्ग फीट जमीन बांसफाटक के पास मिली है। सचिव ने बताया कि इस जमीन पर कामर्शियल कांपलेक्स का निर्माण किया जाएगा।
जिला प्रशासन को लीज पर दी थी जमीन
1993 में इस जमीन को लीज पर जिला प्रशासन को दिया गया था कि पुलिस कंट्रोल रूम बना लिया जाए, जिससे कि मंदिर और मस्जिद की हिफाजत हो सके। काशी विश्वनाथ धाम का दायरा भी बढ़ा है तो सुरक्षा का बड़ा इंतजाम किया जा रहा है। वहीं कॉरिडोर में जाने के लिए रास्ता भी तंग पड़ रहा था। दो साल पहले मंदिर प्रशासन ने जमीन के विनिमय करने का प्रस्ताव रखा था।