गंगा तट से मंदिर चौक तक अभी केवल आने जाने के लिए ही खोला जाएगा। श्रद्धालु आसपास के भवनों में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। घाट से मंदिर चौक तक श्रद्धालु अपना सामान, मोबाइल व कैमरा ले जा सकेंगे। मोबाइल व कैमरा रखने के लिए गंगा द्वार से चौक तक अलग-अलग जगहों पर इंतजाम किया जाएगा।
मंदिर चौक से भक्त सरस्वती फाटक पर जांच कराने के बाद मंदिर में प्रवेश करेंगे और दर्शन के बाद मंदिर परिसर के पूर्वी गेट से बाहर निकलेंगे। चुनार के गुलाबी पत्थरों की आभा से दमक रहे बाबा के धाम में प्रवेश के लिए तैयार गंगा द्वार घाट पर अब नए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। गुलाबी पत्थरों पर नक्काशी कर इसे पूरी भव्यता से आकार दिया गया है। धाम के लोकार्पण के समय ही ढांचा तैयार हो गया था, जो अब जाकर पूर्ण हो सका है।
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काशी विश्वनाथ धाम का प्रवेश द्वार
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गंगा घाट से श्री काशी विश्वनाथ के गर्भगृह तक गंगाजल पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछा दी गई हैं। जलस्तर सामान्य होने के बाद पंप भी लगा दिया जाएगा। इसके साथ ही अंडरग्राउंड सीवेज पंपिंग स्टेशन में भी डेढ़ से दो माह का समय लग जाएगा।
गंगा में चल रहे नावों का संचालन नगर निगम की देखरेख में किया जाएगा। इस बार महाशिवरात्रि एक मार्च को है। इस दिन तीन जगहों खिड़किया घाट, दशाश्वमेध और अस्सी से मोटरबोट चलाई जाएंगी। जो विश्वनाथ धाम के द्वार ललिता घाट पर जाकर रुकेगी और भक्तों को उतारेगी।
नगर निगम रूपरेखा तैयार कर रहा है। कमिश्नर दीपक अग्रवाल के निर्देश पर नगर आयुक्त प्रणय सिंह ने मातहतों को निर्देश दिया है। जिसके बाद काम शुरू हो गया है। इस सुविधा के बाद भी भक्तों को गंगा के रास्ते से बाबा के दर्शन की सुविधा में आसानी होगी।