Varanasi News: धनतेरस और दीपावली पर पहली बार स्वर्णजड़ित मां अन्नपूर्णा के दर्शन होने लगे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रतिमा और मंदिर में छह किलोग्राम सोने का इस्तेमाल किया गया है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में मां अन्नपूर्णा के मूल विग्रह के साथ ही बड़ी प्रतिमा स्वर्णजड़ित करा दी गई। मूल विग्रह 108 साल तक कनाडा के एक संग्रहालय में संरक्षित था जो बाद में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित किया गया। अब मंदिर को भी शिखर तक स्वर्णजड़ित कर दिया गया।
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काशी खंड के अनुसार प्राचीन पौराणिक मां अन्नपूर्णा का स्थान भगवान विश्वनाथ के ईशान कोण में है। मां अन्नपूर्णा का मूल स्वर्ण विग्रह चोरी हो गया था जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में नवंबर 2021 में कनाडा के एक संग्रहालय से वापस भारत लाया गया था।
भारत और कनाडा के विश्वविद्यालयों के संयुक्त प्रयास से मूल प्राचीन विग्रह की पहचान की गई। 2021 में ही मूल विग्रह श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित किया गया था। इसके यजमान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बनाए गए थे। मूल मंदिर में मूल विग्रह के साथ ही एक मानव आकार की रजत मंडित प्रस्तर प्रतिमा स्थापित गई थी जो अब स्वर्णजड़ित करा दी गई। इसका पूजन शुरू हो गया।
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मंदिर के सूत्रों के मुताबिक, भगवान काशी विश्वनाथ के ईशान कोण में स्थापित मां अन्नपूर्णा के दर्शन के विशेष महत्व हैं। धनतेरस और दीपावली में श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। यह मंदिर काशी के सबसे बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र बन रहा है।