गिनती के कार्य में मुमुक्षु भवन की 20 से 25 वरिष्ठ महिलाएं तथा सेवानिवृत्त क्लास-वन अधिकारी स्वयंसेवक के रूप में सहयोग करते हैं। बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में नोटों और सिक्कों की संख्या का विवरण रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। इसके बाद धनराशि को बैंक खाते में जमा कराया जाता है और बैंक स्टेटमेंट से मिलान कर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाता है।
मंडलायुक्त ने बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य धातुओं को अलग से सुरक्षित रखा जाता है। विशेषज्ञों की मदद से उनकी शुद्धता और मूल्य का आकलन किया जाता है। इसके बाद उन्हें ट्रेजरी में जमा कर संबंधित अभिलेखों में दर्ज किया जाता है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल दान के लिए मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर क्यूआर कोड की सुविधा उपलब्ध है। श्रद्धालु मंदिर कार्यालय में जाकर भी दान कर सकते हैं, जहां उन्हें विधिवत रसीद प्रदान की जाती है। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य दान प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए रखना है।