वाराणसी में सावन के पहले सोमवार को केदार घाट से गंगा जल लेकर बाबा विश्वनाथ जी जलाभिषेक करने जाते ?
वाराणसी। तन पर श्वेत वस्त्र, हाथ में डमरू, कंधे पर गंगाजल से भरे गगरे और हर-हर महादेव के जयकारे के साथ सावन के पहले सोमवार पर बाबा का जलाभिषेक करने के लिए यादव बंधुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। यदुवंशी समाज ने पूरे उत्साह और आस्था के साथ इस 87 साल की परंपरा का निर्वाह किया। दशाश्वमेध घाट स्थित शीतला माता मंदिर, मानमंदिर स्थित आल्हादेश्वर महादेव का जलाभिषेक करते हुए यदुवंशियों के हुजूम ने डेढ़सी पुल से साक्षी विनायक का दर्शन कर ढुंढिराज मंदिर के सामने से विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश किया।
प्रात: सात बजे से पूर्वाह्न दस बजे तक सोनारपुरा से दशाश्वमेध के बीच यदुवंशियों का रेला ही नजर आ रहा था। जलाभिषेक यात्रा की शुरूआत केदारघाट से हुई। सबसे पहले गौरीकेदारेश्वर का जलाभिषेक करने के लिए शहर भर से यदुवंशियों का जुटान केदार घाट पर हुआ। हजारों की संख्या में यदुवंशी अपने-अपने गगरों में गंगा जल लेकर केदारमंदिर में प्रवेश किए। घाट पर प्रवेश और निकास की व्यवस्था एक ही मार्ग से किए जाने से चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के पदाधिकारियों ने विरोध भी दर्ज कराया। केदार गली से केदार घाट की ओर खुलने वाली करीब तीस मीटर लंबी गुफानुमा गैलरी में प्रकाश की व्यवस्था न होने और भीड़ अधिक होने से कुछ किशोर दब गए थे। अव्यवस्था के बीच गौरीकेदारेश्वर को जल अर्पित करने के बाद यदुवंशियों का समूह छोटे-छोटे जत्थों में स्वयंभू तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर की ओर रवाना हुआ। यहां जलाभिषेक कर सभी बाबा दरबार की ओर रुख किए। यदुवंशियों की जलाभिषेक यात्रा में गृहराज्यमंत्री नित्यानंद राय, सांसद अलवर बालकनाथ, तेजबहादुर यादव ने जलाभिषेक किया। वहीं अखिलभारतीय यादव महासभा के दिल्ली व अन्य प्रदेशों के पदाधिकारियों ने भी जलाभिषेक किया। ओबीसी आयोग के पूर्व चेयरमैन जगदीश यादव ने शालिनी यादव व सांसद बाबा बालकनाथ का स्वागत किया। कृष्ण यादव महासभा की ओर से मदन यादव, अनिल यादव, लक्ष्मण यादव, ओम यादव आदि मौजूद रहे।
सन 1932 में अकाल पड़ा था तब बारिश के लिए यदुवंशियों ने बाबा का जलाभिषेक किया था। शीतला गली निवासी भोला सरदार, कृष्णा सरदार, बच्चा सरदार, ब्रह्मानाल निवासी चुन्नी सरदार और रामजी सरदार घनिष्ठ मित्र थे। काशीवासियों को अकाल से उबारने के लिए उन्होंने संकल्प लिया कि यदि बाबा के जलाभिषेक के बाद वर्षा हो गई तो अगले साल से संपूर्ण यदुवंशी समाज अभिषेक करेगा। उस समय के विख्यात कर्मकांडी पं. शिवशरण शास्त्री की सलाह पर अन्य प्रमुख शिवालयों में भी अभिषेक का निर्णय हुआ। उन पांच मित्रों ने गौरीकेदारेश्वर से लाट भैरव मंदिर के बीच विश्वनाथ मंदिर सहित कुल सात शिवालयों, एक भैरव मंदिर और एक शक्ति पीठ में जलाभिषेक किया। इन सभी के परिजन अब भी जलाभिषेक यात्रा से जुड़े हुए हैं।