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सुरक्षित है मां सरस्वती की मूर्ति, गोयनका भवन में हो रही पूजा

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वाराणसी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने सोमवार को आरोप लगाया था कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के सरस्वती फाटक पर स्थित आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित देवी सरस्वती के मंदिर को तोड़ने के बाद गंगा दशहरा के दिन प्रतिमा को हटा दिया गया है। इस पर वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा ने कहा कि मां सरस्वती की मूर्ति को दीवार सहित हटाया गया है, ताकि विग्रह को कोई नुकसान न हो। मूर्ति को मेरी देखरेख में वहां से सुरक्षित तरीके से दीवार सहित हटाकर गोयनका भवन में अन्य मूर्तियों के साथ रखा गया है। उन्होंने बताया कि मां सरस्वती की मूर्ति उनके पुश्तैनी ज्योतिष कार्यालय के नीचे विराजमान थी। इस भवन को उन्होंने मंदिर प्रशासन को दान में दिया था। काशी विश्वनाथ धाम से हटाई गई मूर्तियों के लिए दो पुजारियों को लगाया गया है। माता सरस्वती की मूर्ति की पूजा और आरती का जिम्मा कन्हैया यादव और उनके परिवार पर मैंने छोड़ रखा है, न्यास से इसकी अनुमति भी मिल गई है।
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सीएम ने दिया था मंदिरों को संरक्षित करने का भरोसा
पद्मपति शर्मा ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह घोषणा की थी कि केवल मंदिर ही नहीं बल्कि आदि शंकराचार्य की प्रतिमा भी वहां स्थापित की जाएगी। जो भी बड़े मंदिर जहां खड़े हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। इनकी संख्या 43 से ज्यादा है। इनका जीर्णोद्धार करवाया जाएगा लेकिन दुर्मुख विनायक, प्रमोद विनायक आदि की मूर्तियों पर शासन और प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि उन्हीं स्थानों पर मंदिर बनाए जाएंगे। 2018 में सीएम से मुलाकात के दौरान उन्होंने आश्वासन दिया था कि सभी मंदिर संरक्षित किए जाएंगे। मंदिरों के नवीनीकरण का काम जल्द शुरू होगा।
रचा जा रहा षडयंत्र
मंगलवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि काशी में शंकराचार्य परंपरा और सनातन धर्म को खंडित करने का षडय़ंत्र रचा जा रहा है। धर्म की नगरी काशी से महापुरुषों और आदि शंकराचार्य के जीवन और परंपराओं से जुड़ी स्मृतियों को मिटाया जा रहा है।
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