काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद और शासन के एक बार फिर से टकराव की आशंका बढ़ गई है। शासन की ओर से प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य) नवनीत सहगल ने मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण को पत्र लिखकर चुनाव आचार संहिता से ठीक पहले हुई न्यास परिषद की बैठक अमान्य कर दी है।
प्रमुख सचिव का तर्क है कि शासन को सूचना दिए बगैर की गई बैठक मान्य नहीं हो सकती। उधर, न्यास अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी ने कहा है कि कोरम पूरा होने पर ही बैठक हुई थी, इसलिए अब इस पर सवाल खड़ा करने का औचित्य नहीं बनता है।
इसी के साथ न्यास की 90वीं बैठक में भवनों, वाहनों की खरीद के अलावा श्रद्धालुओं के लिए सहज दर्शन समेत लिए गए कई अहम फैसलों के भी रद्द होने के आसार हैं। इसी बैठक में आदर्श आचार संहिता बनाने, पांच सौ रुपये के टिकट पर आम श्रद्धालुओं के लिए सहज दर्शन की व्यवस्था करने संबंधी फैसले लिए गए थे। बैठक का कार्य वृत्त जारी करते हुए एजेंडे पर अमल भी शुरू कर दिया गया था।
न्यास परिषद की बैठक अमान्य किए जाने संबंधी शासन का पत्र मिलने के बाद विश्वनाथ मंदिर प्रशासन में अंदरखाने हड़कंप मच गया है। मंदिर प्रशासन पसोपेश में है कि आखिर अब किया क्या जाए। कहा जा रहा है कि इस बैठक के बाद प्रमुख सचिव धर्मार्थ कार्य की अनुमति से ही बांस फाटक पर 1.88 करोड़ रुपये का भवन खरीदा था।
इस मद में शासन ने धन भी अवमुक्त कर दिया है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी निखिलेश कुमार मिश्र ने प्रमुख सचिव की ओर से न्यास की बैठक अमान्य किए जाने संबंधी पत्र मिलने की पुष्टि की।
बताया कि शनिवार को मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएन त्रिपाठी के आने के बाद इस मसले पर निर्णय लिया जाएगा।