वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रसंघ चुनाव में मतदान का प्रतिशत निराशाजनक रहा। रविवार को हुए मतदान में मतदाता पचास फीसदी का भी आंकड़ा पार नहीं कर पाए। इस साल महज 45.8 फीसदी ही मतदान हुआ जो कि पिछली बार से कम रहा। बीते साल 58.1 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।
काशी विद्यापीठ में रविवार को सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक वोटिंग हुई। इसमें शुरुआत के एक घंटे पांच फीसदी से कम वोटिंग हुई। वहीं दस बजे तक दस फीसदी वोटिंग हुई। दस बजे से एक बजे तक हर एक घंटे पर करीब दस-दस फीसदी वोटिंग हुई। मतदान के अंतिम एक घंटे में जहां वोटिंग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है थी लेकिन हुआ इसका ठीक उलटा।
एक बजे तक 41.94 वोटिंग हुई। वहीं आखिरी एक घंटे में महज 3.9 फीसदी ही वोट पड़े। इसमें भी छात्राओं का वोटिंग प्रतिशत काफी कम रहा। कुल 8830 मतदाताओं में 4053 ने वोट डाला। इसमें छात्रों का वोटिंग प्रतिशत 70 रहा, वहीं छात्राओं का वोटिंग फीसदी महज 29.9 रहा। जबकि बीते साल छात्रों ने 66.34 फीसदी वोटिंग की थी और 45.97 फीसदी छात्राओं ने मत का इस्तेमाल किया था।
प्रमुख पदों की वोटिंग में नोटा का बटन
काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर खड़े तीनों दावेदारों को 80 मतदाताआें ने रिजेक्ट कर दिया। तीन में से किसी एक को चुनने की बजाय 80 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। इसी तरह महामंत्री पद पर हुई वोटिंग में 82 ने नोटा का बटन दिया। प्रमुख चार पदों पर कुल 288 ने नोटा का इस्तेमाल किया। वहीं चुनाव में अवैध वोट भी खूब पड़े। अध्यक्ष पद पर 19 अवैध मत पड़े। वहीं महामंत्री पद पर 25, उपाध्यक्ष पद पर 32 और पुस्तकालय मंत्री पद पर 26 अवैध वोट पड़े।
एबीवीपी का अध्यक्ष पर पूरा जोर
काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ चुनाव में दो साल बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अध्यक्ष पद पर अपना कब्जा जमाया। इस बार अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए एबीवीपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। संघ की सलाह को दरकिनार करते हुए अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने के लिए उन्होंने इस पद पर विकास पटेल को लड़ाया और अपनी प्रतिष्ठा बचाने में कामयाब भी हुए लेकिन अन्य पदों पर निराशा हाथ लगी।
एबीवीपी का पूरा जोर अध्यक्ष पद के लिए ही था। हालांकि परिषद अध्यक्ष और पुस्तकालय मंत्री पद पर जीत को लेकर आश्वस्त था लेकिन उन्हें एक ही सीट पर जीत से संतोष करना पड़ा। उधर, समाजवादी छात्र सभा ने अन्य तीन पदों पर अपनी जीत को बरकरार रखा। हालांकि इसमें भी एनएसयूआई की भूमिका अहम थी। महामंत्री पद पर एबीवीपी और समाजवादी छात्र सभा में सीधी टक्कर थी। इस पद के लिए एनएसयूआई का कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं था।
मतदान के दौरान दिखा रोचक नजारा
- फोटो : अमर उजाला
जमीन पर चादर बिछाकर छात्रसंघ चुनाव के प्रत्याशी लेटे थे और आने जाने वाले छात्रों पर टकटकी लगाए थे। जैसे ही छात्र पास से गुजरते, उसकी चरण वंदना करने लगते। उसके पैर पकड़कर प्रत्याशी लिपट जाते, हाथ जोड़कर गुहार करते। मनुहार करते कि भइया वोट हमही के देइहा। यह नजारा रविवार को काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ चुनाव के मतदान के दौरान रहा। कई छात्र तो वोट मांगने के इस अनूठे अंदाज से वाकिफ थे लेकिन जो नये थे वो ये तरीका देखकर हैरान जरूर थे।
इन सबके साथ ही पुलिस अधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक छात्रों के इस अंदाज से हैरत में रहे। छात्रसंघ चुनाव का जायजा लेने एसएसपी आनंद कुलकर्णी के साथ पहुंचे डीएम सुरेंद्र सिंह ने छात्रों के इस तरीके पर हैरानी के साथ ही नाराजगी जताई।
उन्होंने प्रत्याशियों से पहले तो खड़े हो जाने को कहा। जब वो नहीं खड़े हुए तो उन्होंने यहां तक कहा कि खड़े हो जाओ, नहीं तो यहां से उठाकर बंद करवा देंगे। छात्रों से कहा कि ‘आप कम से कम अपना आत्मसम्मान तो रखो, अपने मां-बाप का तो पैर नहीं छूते, यहां लड़कों के पैर छू रहे हो’। इसके साथ ही उन्होंने वहां से चादरें हटवाने तक का निर्देश दिया लेकिन, उनके जाते ही फिर से सभी प्रत्याशी अपने पुराने की रौ में लौट आए।