काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में मेधावी को स्वर्णपदक प्रदान करतीं कुलाधिपति और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 39वें दीक्षांत समारोह में 37 मेधावियों को 64 स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किए गए। आचार्य परीक्षा (साहित्य) में सर्वाधिक अंक हासिल करने पर प्रतापगढ़ के संस्कृत विश्वविद्यालय के रवि कुमार जायसवाल को नौ स्वर्ण पदक दिए गए। आचार्य (शुक्ल यजुर्वेद) में सौरभ शुक्ला और सुदर्शन गौतम (नब्य व्याकरण) को पांच-पांच स्वर्ण प्रदान किया गया।
सोमवार को निर्धारित समय से एक घंटे की देरी से दीक्षांत समारोह के शिष्ट मंडल की यात्रा आरंभ हुई। कुलाधिपति ने दीक्षांत समारोह आरंभ करने की घोषणा की और इसके बाद लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी को वाचस्पति की मानद उपाधि प्रदान की गई। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को समावर्तन संस्कार की शपथ दिलाई और शास्त्री-आचार्य, शोध सहित 15,520 विद्यार्थियों को दीक्षित किया।
समारोह का संपूर्ण आयोजन संस्कृत भाषा में चला। सिर्फ राज्यपाल व मुख्य अतिथि ने उद्बोधन हिंदी में दिया। समारोह में 15520 को शास्त्री, आचार्य, पीएचडी सहित अन्य पाठ्यक्रमों की उपाधि व सर्टिफिकेट देने की घोषणा की गई। स्वागत कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी, संचालन डा. रविशंकर पांडेय व धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश ने किया।
वाराणसी में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मालिनी अवस्थी को वाचस्पति की उपाधि प्रदान करतीं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में मुख्य अतिथि पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा कि जिसे संस्कृत का ज्ञान नहीं है वह इस पृथ्वी का सबसे बड़ा अभागा इंसान है। संस्कृत से मेरा बचपन से ही जुड़ाव रहा और मैंने जो भी संस्कृत से सीखा उसे लोक संगीत में उतारा। संस्कृत की ही देन है जिसने मुझे लोक को देखने की दृष्टि प्रदान की है।
दीक्षांत समारोह में वाचस्पति की उपाधि मिलने के बाद पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने उपाधि धारकों से कहा कि वेदपाठ से कुछ नहीं होगा जब तक आप उसे आचरण में नहीं उतारेंगे। जीवन भर विद्यार्थी का भाव रखेंगे तो ज्ञान की प्राप्ति होती रहेगी। जब देश से गुुरुकुल नष्ट हो गए, शास्त्र नष्ट हो गए तो भारत की अमूल्य थाती को सहेजने की जिम्मेदारी देश की महिलाओं ने उठाई।