Varanasi News: इस पंचांग में हर पक्ष की प्रत्येक तिथियों में होने वाले विशेष कृत्यों को भी शास्त्र के अनुसार शामिल किया गया है। इसके साथ ही मुंडन, कर्णवेध, यज्ञोपवीत, विवाह, द्विरागमन, वधुप्रवेश, प्रसूता स्नान, व्यापारारंभ, गृहारंभ, गृह प्रवेश, यात्रा, विपणि आदि के मुहूर्त और राशिफल भी दिए गए हैं।
देश का अनूठा हिंदू कैलेंडर शास्त्रीय तिथि पत्र काशी विद्वत परिषद ने तैयार किया है। सोमवार को इस कैलेंडर का लोकार्पण किया गया। कैलेंडर की खास बात यह है कि इसकी तिथि-त्योहारों के साथ मुहूर्त और भद्रा भी लोग आसानी समझ सकेंगे।
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शास्त्रीय तिथि पत्र को पूर्णरूप से पारंपरिक ज्योतिष शास्त्र की सूक्ष्मतम गणना पर आधारित कर आसान बनाया गया है। सामान्य लोग भी सरलतापूर्वक इसे देख और समझ सकेंगे।
सोमवार को काशी विद्वत परिषद कार्यालय पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. रामचंद्र पांडेय की अध्यक्षता में इस कैलेंटर का लोकार्पण किया गया। काशी विद्वत परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि इसमें मास की गणना जनवरी-फरवरी से न होकर भारतीय मास के आधान पर की गई है।
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यह कैलेंडर संवत 2081 के चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होकर चैत्र कृष्ण अमावस्या तक की तिथि, वार, नक्षत्र योग करण के साथ ही इन दिनों की अंग्रेजी तारीखों को सूचित करेगा। लोग इसे सरलता से समझ सकें, इसके लिए हर पक्ष में भद्रा की स्थिति, मूल की स्थिति, पंचक सहित प्रत्येक पक्ष के व्रत-पर्वों को भी धर्मशास्त्रीय आधार पर शामिल किया गया है।
काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि यह तिथि पत्र समाज के लिए निश्चित ही उपयोगी सिद्ध होगा। इस दौरान विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी, प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय, प्रो. विनय कुमार पांडेय, अमित कुमार मिश्र, संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती मौजूद रहे।