शहर की ध्वस्त यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए सड़कों से पारंपरिक रिक्शे हटाए जाएंगे। आने वाले समय में यहां सिर्फ ई-रिक्शा ही चलेंगे। गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए नावों की जगह ई-बोट चलाई जाएगी। खास यह कि पारंपरिक रिक्शा चालकों में ही कुछ को ई-रिक्शे दिए जाएंगे जबकि कुछ को उनकी मरम्मत के काम में लगाया जाएगा। मंडलायुक्त सभागार में मंगलवार को पत्रकारों को यह जानकारी सांसद सीआर पाटिल ने दी। उन्होंने कहा कि बनारस के विकास के लिए धन की कमी नहीं है, जरूरत है तो सिर्फ ठोस कार्ययोजना के सहारे विकास कार्यक्रमों को सही तरीके से लागू कराने की।
सांसद पाटिल ने कहा कि बनारस में मौजूदा समय 20 हजार से ज्यादा पारंपरिक रिक्शे हैं। शहर में ये जगह-जगह जाम का कारण बनते हैं। इसलिए रिक्शा वालों मेें कुछ को ई-रिक्शा देने और कुछ को उनकी मरम्मत आदि के काम लगाने की योजना बनाई गई है। ई-रिक्शा में पारंपरिक रिक्शा की अपेक्षा सवारी भी ज्यादा बैठ सकेंगे और रफ्तार भी तेज रहेगी। इससे दोहरा फायदा होगा। एक तरफ शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर होगी जबकि दूसरी तरफ रिक्शा चालकों की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी।
इसी तरह गंगा में डीजल पंप वाले स्टीमर से ध्वनि, जल और वायु प्रदूषण होता है, इसे रोकने के लिए अब ई-बोट चलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि बनारस में जाम की समस्या के कारण जलथल शव वाहिनी का उद्देश्य नहीं पूरा हो पा रहा है। पुलिस अधिकारियों से बात हुई है, वे सहयोग करेेंगे। कहा कि सिगरा स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जाएगा। इसके लिए एक संस्था 50 लाख और बनारस के ही एक उद्यमी ने 10 लाख रुपये की मदद की पेशकश की है। यहां विकास कार्यों के लिए कई अन्य संस्थाएं भी मदद के लिए तैयार हैं।