दिल्ली की कर विशेषज्ञ सीए आंचल कपूर ने कहा कि जांच के दौरान करदाता के मानवीय अधिकारों और संविधान के अनुच्छेद 21 का सम्मान अनिवार्य है। विशेषकर देर रात बयान दर्ज करने की वैधता पर न्यायालयों के स्पष्ट निर्देश हैं। स्टॉक या रिकॉर्ड में मामूली अंतर दिखने पर सिर्फ अनुमान के आधार पर देयता तय नहीं होनी चाहिए।
इससे पहले आयकर असेसमेंट, पेनल्टी, विदेशी परिसंपत्तियों के प्रकटीकरण, जीएसटी सर्च और कर व्यवसाय में एआई की भूमिका पर देशभर से आए विधि और कर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
कॉन्क्लेव के पहले तकनीकी सत्र में वरिष्ठ कर विशेषज्ञ जगदीश पंजाबी ने कहा कि यदि किसी करदाता की कोई आय भूलवश रिटर्न में दर्ज होने से छूट गई है तो समय रहते विहित प्रक्रिया के अनुसार सुधार कर देय कर का भुगतान कर देना चाहिए। समय पर अनुपालन न होने पर भारी पेनल्टी देनी पड़ती है। धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि नियमित रिटर्न के ठोस साक्ष्यों के बिना विभाग की ओर से अतिरिक्त कर आरोपित नहीं किया जाना चाहिए।
इनकम टैक्स बार एसोसिएशन वाराणसी के अध्यक्ष संजय कुमार वर्मा, महामंत्री वरुण कुमार सिंह, उपाध्यक्ष राजीव कुमार श्रीवास्तव, कॉन्फ्रेंस चेयरमैन असीम जफर, सलाहकार अरविंद शुक्ला तथा को-चेयरमैन ओपी शुक्ला आदि मौजूद रहे।