बीएचयू दृश्य कला संकाय में दो दिवसीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी शुक्रवार से शुरू हो गई। अमर उजाला की ओर से संकाय के अहिवासी कला वीथिका में लगी प्रदर्शनी में 100 से अधिक छायाकारों ने करीब 200 से ज्यादा चित्र लगाए हैं। यहां काशी की कला, संस्कृति, धरोहर की झलक देखने को मिल रही है। छायाकारों ने फोटो के माध्यम से वन्य जीवों के संरक्षण का भी संदेश दिया है। प्रदर्शनी का उद्घाटन वरिष्ठ छायाकार रंजीत सेन ने दीप प्रज्वलित कर किया। रंजीत सेन ने कहा कि तस्वीरें हमारे आसपास ही बिखरी हुई हैं। उन्हें खोजने के लिए भागदौड़ की बजाय दृष्टि विकसित करने की जरूरत है। ऐसा करने से न केवल बेहतर फोटोग्राफी का अवसर मिलता है बल्कि विजन भी अच्छा होता है। जिस तरह से कला संस्कृति और धरोहर को छायाकारों ने चित्र के माध्यम से प्रदर्शित किया है, उनका यह प्रयास सराहनीय है।
प्रमुख प्रोफेसर हीरालाल प्रजापति ने कहा कि कोरोना की वजह से बंद चल रही वीथिका में करीब डेढ़ साल बाद प्रदर्शनी में एक से बढ़कर एक कलाकृतियां देखने को मिल रही हैं। इस तरह के आयोजन से युवाओं को भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है। छाया चित्रों को देखने के लिए छात्रों की भीड़ लगी रही। प्रदर्शनी शनिवार तक चलती रहेगी। संचालन दृश्य कला संकाय की डॉक्टर उत्तमा दीक्षित ने किया। कार्यक्रम में ललित मोहन सोनी, डॉ. आशीष गुप्ता के साथ ही बलराम यादव, मनीष खत्री, रंजन गौड़, आर गणेशन, डॉ. शांति स्वरूप सिन्हा मौजूद रहे।
स्वयंसेवक और विद्यार्थी
दो दिवसीय प्रदर्शनी के पहले दिन छायाचित्रों को देखने के लिए बीएचयू राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों के साथ ही विभिन्न विभागों के विद्यार्थी पहुंचे। उन्होंने छायाकारों की प्रतिभा की सराहना की। देव दीपावली, आकाशदीप, गंगा आरती, छठ पर्व, लक्खा मेले, मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार, घाटों पर पूजा पाठ के साथ ही वन्य जीवों के चित्र लगाए गए हैं।