फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तर के राग, दक्षिण की बेजोड़ थिरकन

Thu, 22 Dec 2016 02:25 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
काशी में राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव
विज्ञापन
महामना की तपोभूमि भारतीय कला-संस्कृति की अपार संपदा की वो खान बन गई है, जहां से हर कोई अपने मन का मोती चुनने के लिए आतुर हो उठा है। बुधवार की शाम एक तरफ कथक और कुचिपुड़ी नृत्य की थिरकन यादगार बनी तो दूसरी ओर जानी मानी ख्याल गायिका अश्विनी देशभिड़े के सुरों की इतराती खुशबू से महामना की बगिया महक उठी। संस्कृति महोत्सव की पांचवी निशा की यह प्रस्तुतियां बीएचयू के ओंकार नाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में हुई।
विज्ञापन


दीप प्रज्जवलन के बाद शुरुआत हुई विशाल कृष्ण के कथक नृत्य से। विशाल ने शिव वंदना से शुरुआत की। विलंबित एक ताल में निबद्ध बंदिश -ऊं शंकर महादेव... के बोल पर उन्होंने भाव नृत्य पेश किया। इसके बाद राग पूरिया धनाश्री में विलंबित तीन ताल की बंदिश पायलिया झनकार... के बोल पर उन्होंने भावों-इशारों से कभी नायिका के सजने -संवरने के भावों को व्यक्त किया तो कभी तिरछे नैन-नक्श से प्रेम की सहज अनुभूति कराई।

इसके बात तीन ताल में पारंपरिक कथक की बंदिशों में टुकड़ा, तिहाई, परन, चक्करदार, गत की बेजोड़ प्रस्तुति की। अंत में अपनी दादी कथक क्वीन सितारा देवी की बंदिश ठुमुक चलत रामचंद्र बाजत पैजनियां के बोल पर भाव नृत्य पेश कर तालियां बटोरीं। तबले पर कुशाल कृष्ण, बांसुरी पर शनीश ज्ञावली, सरोद पर अंशुमान महाराज ने संगत की। गायन किया प्रेम किशोर मिश्र ने। इनके बाद अश्विनी देशभिड़े ने राग भीमपलासी में विलंबित ताल की बंदिश से शुरुआत की। बोल थे- धीरज धरो उद्धव तुम...।
विज्ञापन


इसी राग में द्रुत लय की बंदिश मिल जाना राम पियारे...की उन्होंने प्रस्तुति की। फिर राग हंसध्वनि में दो बंदिशें उन्होंने पेश की। अंत में दादरा- कैसा जादू डाला के बाद तराना से उन्होंने विदा ली। तबले पर विनोद लेले, हारमोनियम पर विनय मिश्रा ने संगत की। इनके बाद जानी मानी नर्तक जोड़ी डॉ. राजा राधा रेड्डी ने कुचिपुड़ी नृत्य में श्रीकृष्ण पर आधारित ‘तरंग’ व शिव पर आधारित ‘महानट्टम’ की प्रस्तुति की। महानट्टम में राजा शिव के रूप में थे तो राधा पार्वती के रूप में सजी थीं। शिव-पार्वती के नृत्य के भावों को उन्होंने मोहक अंदाज में पेश किया। नृत्य में इनके साथ पुत्री भावना रेड्डी के अलावा गौरी तनेजा, महेश, अहीशा, दिव्यांगना, भूमिका शर्मा भी थीं। मयूर, हंस-हंसिनी, गज-गजिनी के भावों को कुचिपुड़ी नृत्य में पिरोया।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें