काशी महाकाल एक्सप्रेस के रवाना होने से पहले रेलवे की एक चूक दिखाई पड़ी। ट्रेन के रवाना होने से पहले ही कैंट स्टेशन की स्क्रीन पर ट्रेन कैंसिल(निरस्त) दिखाई दी। इससे यात्रियों में एक दम हड़बड़ी मच गई। हालांकि कुछ समय बाद यह ठीक हो गया।
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रेलवे अधिकारियों ने बताया कि तकनकी गड़बड़ी की वजह से ट्रेन कैंसिल दिखाई दे रही थी। काशी महाकाल एक्सप्रेस दोपहर वाराणसी के कैंट स्टेशन से 2.45 बजे इंदौर के लिए रवाना हो गई और दूसरे दिन सुबह 9.40 बजे इंदौर पहुंचाएगी।
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16 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने पड़ाव से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया था। टह ट्रेन तीन ज्योतिर्लिंगों (श्रीओम्कारेश्वर, श्री महाकालेश्वर और काशी विश्वनाथ) के दर्शन कराएगी।
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स्टेशन से ट्रेन को रवाना करने से पहले यात्रियों पर पुष्पवर्षा की गई थी। आधुनिक सुविधाओं से लैस तृतीय श्रेणी वातानुकूलित यह ट्रेन वाराणसी से चलकर सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर, झांसी, बीना, भोपाल, उज्जैन के रास्ते इंदौर स्टेशन सुबह के 9.30 बजे पहुंचाएगी।
ट्रेन के एक कोच की सीट पर भगवान शिव का मिनी मंदिर बनाया गया था, जिस पर विवाद शुरू हो गया था तो आईआरटीसी ने इस पर सफाई दी थी। इस मामले पर एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसे लेकर पीएमओ को टैग करते हुए संविधान की प्रस्तावना ट्वीट किया था। मंदिर को वहां से रसोईयान(पैंट्रीकार) में शिफ्ट कर दिया है।