हजारों साल का इतिहास समेटे काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के जिन मकानों को अधिग्रहीत किया जा रहा है उनकी कीमत दूसरे क्षेत्रों की तुलना में भवन स्वामियों को आधी से भी कम मिल रही है। दशाश्वमेध वार्ड का सर्किल रेट जहां 20 से 30 हजार रुपये वर्ग मीटर रखा गया है वहीं रथयात्रा, जगतगंज, लहुराबीर, लक्सा में 50 हजार रुपये वर्ग मीटर है। यानी पीढ़ी दर पीढ़ी रह रहे लोगों के मकानों की जो कीमत मिल रही है उससे बाहरी इलाकों में अच्छा प्लाट भी नहीं मिल सकता। इसको लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है।
सर्किल रेट की बात करें तो सबसे व्यस्त और काशी को पहचान देने वाले चौक वार्ड का रेट शहर में सबसे कम है। विश्व प्रसिद्ध ज्ञानवापी क्षेत्र, हड़हा, सुड़िया, रेशम कटरा, राजा दरवाजा, बेनियाबाग, ठठेरी बाजार, कचौड़ी गली,आसभैरव आदि का सर्किल रेट महज 20 हजार रुपये वर्ग मीटर है। यही रेट कोतवाली वार्ड केअंबिया मंडी, ईश्वरगंगी, बीबी हटिया, विशेश्वरगंज, गायघाट, सप्तसागर, बुलानाला, ईश्वरगंगी समेत आसपास के इलाकों का है।
वहीं कृष्ण धर्मशाला कैंट से रथयात्रा चौराहे तक, रथयात्रा से महमूरगंज, रथयात्रा से सिगरा और सिद्धगिरीबाग तक 50 हजार रुपये वर्गमीटर की जमीन है।
इसी तरह जगतगंज चौराहे से रामकटोरा, पिलानी कटरा तक, गोलघर चौराहे से पुलिस लाइन होते हुए चौकाघाट तक, गोलघर चौराहे से अर्दली बाजार, शिवपुर होते हुए रेलवे क्रासिंग तक, पांडेयपुर से तेलियाबाग तक 44 हजार वर्ग मीटर रखा गया है सर्किल रेट।
दशाश्वमेध वार्ड में आवासीय भवनों का जो सर्किल रेट 30 हजार रुपये वर्ग मीटर है वह मुख्य मार्गों के किनारे स्थित भवनों का है। चौका लगी हुई गलियों में 20 हजार वर्ग मीटर का रेट है। कार्नर प्लाट या मकान का सर्किल रेट दस प्रतिशत ज्यादा है।
बाबतपुर रोड, आजमगढ़ और आशापुर मार्ग के साथ ही लंका इलाके में 35 से 40 लाख रुपये प्रति बिस्वा जमीन बिक रही है। जिन स्थानों पर भवन खरीदे जाने हैं वहां का सर्किल रेट भी शहर के अन्य स्थानों की तुलना में कम है। अर्दली बाजार में भी 44 हजार रुपये वर्ग मीटर का सर्किल रेट चल रहा है।
हाल ही में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद ने दशाश्वमेध वार्ड के जिन दो पुराने भवनों को 37 और 60 लाख में खरीदा है उन्हें कागजात में व्यावसायिक भवन बताया गया है।
इनका सर्किट रेट आवासीय भवनों की अपेक्षा ज्यादा होता है। दोनों भवनों की रजिस्ट्री 55 हजार वर्ग मीटर सर्किल रेट के हिसाब से की गई है। बताया गया है कि इन दोनों भवनों के भूतल पर कभी दुकानें हुआ करती थीं।