बनारस में कोचिंग की भरमार है। दुर्गाकुंड, लंका, पांडेयपुर, भोजूबीर का इलाका पूरी तरह से कोचिंग हब के रूप में विकसित हो चुका है। जिले में शायद ही कोई मोहल्ला और कालोनी होगी जहां पर कोचिंग के केंद्र ना हों।
अब न तो कोटा, न ही दिल्ली और न ही प्रयागराज जाने की जरूरत है। चाहे सिविल हो, मेडिकल हो, इंजीनियरिंग या फिर एसएससी की परीक्षाएं। हर तरह की कोचिंग अब सर्व विद्या की राजधानी बनारस में ही उपलब्ध है। नई दिल्ली, कोटा और प्रयागराज के बाद बनारस अब बड़े कोचिंग हब के रूप में उभरा है। गली-गली में कोचिंग संस्थाओं का संचालन हो रहा है। यही नहीं देश की तमाम बड़ी कोचिंग संस्थाओं की शाखाएं भी छात्र-छात्राओं की सहूलियत के लिए खुल चुकी हैं।
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बनारस में कोचिंग की भरमार है। दुर्गाकुंड, लंका, पांडेयपुर, भोजूबीर का इलाका पूरी तरह से कोचिंग हब के रूप में विकसित हो चुका है। जिले में शायद ही कोई मोहल्ला और कालोनी होगी जहां पर कोचिंग के केंद्र ना हों। इन कोचिंग संस्थानों में जिले ही नहीं पूर्वांचल के साथ-साथ दूसरे प्रदेशों से भी हजारों विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। कुछ कोचिंग संस्थान पठन-पाठन की गुणवत्ता को कोटा, नई दिल्ली और प्रयागराज की तरह ही बनाए हुए हैं। बनारस में कोचिंग संस्थानों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कोचिंग संस्थानों में दाखिला लेने वाले बाहरी छात्रों को हॉस्टल की भी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसी का परिणाम है कि हर साल मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं में बनारस की कोचिंग के विद्यार्थियों का दबदबा कायम रहता है। शहर में जेआरएस, एंबीशन, रेजोनेंस, कैटजी और ओरिजेंस कोचिंग की शाखाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के परिणाम हर साल बेहतर होते हैं।