अतिथि देवो भव: की परंपरा का पालन करने वाली काशी वैभवशाली सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत के साथ दुनिया भर से आए मेहमानों के सत्कार में खिल उठी है। प्रवासियों के स्वागत के लिए लंबे समय से की जा रही तैयारियां सोमवार को मुकम्मल नजर आईं। जिधर भी देखा, काशीवासी बांहें फैलाए अपनों की आवभगत को उत्सुक रहे।
जगह-जगह लगाए गए अलग-अलग देशों के राष्ट्रीय ध्वज, उनके स्वागत के लिए लगाए गए होर्डिंग, सजाए गए बाजार और दीवारों पर उकेरी गई यहां की खासियतों को देखकर प्रवासी बरबस बोल रहे हैं-काशी ऐसी है। इसमें अनगिन रंग हैं। कभी सोचा न था। हमारा भाग्य है कि हम ये सब न देख रहे हैं, उल्लास को महसूस कर रहे हैं।
पहले दिन के उत्साह से ‘तन से बहुत हसीन हैं मेरे शहर के लोग, मन से बहुत जहीन हैं मेरे शहर के लोग’ की बात सही साबित हो रही है। बाबतपुर एयरपोर्ट से लेकर ऐढ़े गांव स्थित टेंट सिटी (बालेश्वर अग्रवाल नगर), दीनदयाल हस्तकला संकुल से काशी के घाटों पर पूरे ठाठ-बाट के साथ अपनों का स्वागत किया गया।
काशीवासी प्रवासियों को संस्कृति, सभ्यता और अध्यात्म के अद्भुत, अविस्मरणीय और अलौकिक दर्शन कराकर उन्हें कभी न भूलने वाली यादें दे रहे हैं। ये यादें उनके जेहन में सदियों तक जीवंत रहेगी। काशी के लोग ही नहीं, यहां के दर-ओ-दीवार ने भी अपने आतिथ्य परंपरा का परदेसियों का मान रख रही हैं।
सामंजस्य को देखकर प्रवासी निहाल हो रहे हैं। उन्हें सही मायनों में वसुधैव कुटुंबकम की भावना दिख रही है। प्रवासियों की मेहमाननवाजी में पूरी काशी नए कलेवर और रंग में नजर आ रही है। चमकती सड़कों से लेकर बोलती दीवारें, रौशनी से जगमगाते घाटों पर बने महल से लेकर सीढ़ियां जैसे एक नई ही आभा में प्रवासियों के स्वागत के लिए तैयार हैं। इस कलेवर में लोक संस्कृति के रंग भी हैं।