काशी में गुरुकुल पद्धति से वेद-पुराणों के अध्ययन में लगे बटुक पहली बार संगीत साधना भी कर रहे हैं। सुबह वेद पाठ और शाम को कला साधकों के सानिध्य में सुर-साज का प्रशिक्षण ले रहे हैं। धर्मसंघ दुर्गाकुंड में करीब आठ राज्यों के 150 बटुक वर्तमान में सुर-साज की बारीकियां सीख रहे हैं।
चार वेद के बाद महाभारत को पंचम वेद माना जाता है। लेकिन, धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज ने देवों को प्रिय शास्त्रीय संगीत को भी पंचम वेद का रूप माना है। यही वजह है कि उनकी तपोभूमि धर्मसंघ में वेदपाठी बटुकों को अक्षय तृतीया से इस पंचम वेद को सिखाने की परंपरा शुरू की गई है। ताकि वे देवों के पूजन-अर्चन के साथ उन्हें राग भोग भी अर्पित कर सकें।
पं. शिवनाथ मिश्र म्यूजिक एकेडमी के कुशल कलाकार उनको निशुल्क संगीत की शिक्षा दे रहे हैं। धर्मसंघ के महामंत्री पं. जगजीतन पांडेय ने बताया कि स्वामी करपात्री की प्रेरणा से नादब्रह्म की उपासना की व्यवस्था की गई है। आश्रम में यूपी के अलावा झारखंड, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उपराखंड, राजस्थान आदि राज्यों के बटुक वेद की पढ़ाई कर रहे हैं।