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UP: काशी में आठ राज्य के 150 बटुक सीख रहे वेद के साथ संगीत की लयकारियां, पहली बार शुरू हुई परंपरा

Tue, 28 Apr 2026 06:31 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: चार वेद के बाद महाभारत को पंचम वेद माना जाता है। लेकिन, धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज ने देवों को प्रिय शास्त्रीय संगीत को भी पंचम वेद का रूप माना है। 
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संगीत का प्रशिक्षण लेते बटुक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशी में गुरुकुल पद्धति से वेद-पुराणों के अध्ययन में लगे बटुक पहली बार संगीत साधना भी कर रहे हैं। सुबह वेद पाठ और शाम को कला साधकों के सानिध्य में सुर-साज का प्रशिक्षण ले रहे हैं। धर्मसंघ दुर्गाकुंड में करीब आठ राज्यों के 150 बटुक वर्तमान में सुर-साज की बारीकियां सीख रहे हैं। 

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चार वेद के बाद महाभारत को पंचम वेद माना जाता है। लेकिन, धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज ने देवों को प्रिय शास्त्रीय संगीत को भी पंचम वेद का रूप माना है। यही वजह है कि उनकी तपोभूमि धर्मसंघ में वेदपाठी बटुकों को अक्षय तृतीया से इस पंचम वेद को सिखाने की परंपरा शुरू की गई है। ताकि वे देवों के पूजन-अर्चन के साथ उन्हें राग भोग भी अर्पित कर सकें। 

पं. शिवनाथ मिश्र म्यूजिक एकेडमी के कुशल कलाकार उनको निशुल्क संगीत की शिक्षा दे रहे हैं। धर्मसंघ के महामंत्री पं. जगजीतन पांडेय ने बताया कि स्वामी करपात्री की प्रेरणा से नादब्रह्म की उपासना की व्यवस्था की गई है। आश्रम में यूपी के अलावा झारखंड, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उपराखंड, राजस्थान आदि राज्यों के बटुक वेद की पढ़ाई कर रहे हैं।

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पहले चरण में गायन और तबला वादन का प्रशिक्षण

फाउंडेशन के निदेशक एवं प्रख्यात सितारविद पं. देवब्रत मिश्र ने बताया कि अभी उनको सुर, लय और ताल की बेसिक जानकारी दी जा रही है। ताकि वह जान सकें कि संगीत क्या है। पहले चरण में गायन, तबला और हारमोनियम बजाना सिखाया जा रहा है। तबला वादन का प्रशिक्षण आनंद मिश्रा, प्रशांत मिश्र और नवनीत प्रजापति दे रहे हैं। जबकि गायन पं. देवव्रत मिश्र खुद सीखा रहे हैं। दो महीने बाद उन्हें सितार वादन और बांसुरी वादन सिखाया जाएगा।

बटुकों में दिखी रुचि
धर्मसंघ में पिछले दिनों आयोजित तीन दिवसीय काशी संगीत कला महोत्सव में बटुकों की भी रुचि दिखी। पं. जगजीतन पांडेय ने बताया कि उनकी रुचि को देखते हुए शास्त्रीय संगीत की विधा से जोड़ने का निर्णय लिया गया। आगे चलकर बाहर के मठों और आश्रमों में पढ़ाई कर रहे जिन बटुक की रुचि संगीत में होगी, उनको भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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