श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि करवा चौथ उत्तर भारत में विशेषकर मनाया जाता है। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि करवा चौथ के एक दिन पहले 28 अक्तूबर की शाम 5:31 बजे भद्रा लगेगा और भोर में 4:27 बजे समाप्त हो जाएगा।
इसलिए व्रत और पूजा पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। 28 को ही सुबह 7:35 बजे शुक्र पूरब में उदय होंगे। इनके उदय को मंगलकारी माना गया है। बताया कि करवा चौथ पर वरीयान योग, परिघ, पंच महापुरुष, बुध आदित्य, पाराशरी राजयोग, मालव्य पंच, सरस्वती, अखंड सौभाग्य, अखंड सौभाग्य योग बन रहे हैं।
कुमकुम, सिंदूर व पंचामृत से करेंगी पूजा
मिट्टी का टोंटीदार करवा, ढक्कन, जल का लोटा, पूजा की छलनी से पूजा होगी। पीली मिट्टी, लकड़ी की चौकी, अक्षत (चावल), कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, चंदन, धूप-अगरबत्ती, दीपक, कपूर, रुई, पुष्प, गेहूं, कच्चा दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, शकर, गंगाजल, मिठाई, शकर, हलवा और आठ पुड़िया आदि चढ़ाई जाएगी।
करवा चौथ मिलन समारोह में दिखी परंपरा की झलक
वाराणसी। खत्री मित्र मंडल की ओर से सोमवार को एक होटल में करवा चौथ मिलन समारोह का आयोजन हुआ। सभी महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर पहुंचीं। कार्यक्रम की शुरुआत करवा चौथ की कहानी पर आधारित नाटक के मंचन से हुई। समूह की महिलाओं ने इस प्रस्तुति में भाग लिया। इस मौके पर समूह की चेयरपर्सन आरती अरोड़ा ने करवा चौथ के महत्व के बारे में बताया। कार्यक्रम में कई खेल आयोजित किए गए और सामूहिक नृत्य भी हुआ। ऋतु अरोड़ा, शालिनी, नेहा टंडन और रिद्धि ने नृत्य प्रस्तुत किया।