करवा चौथ और संकष्ठी गणेश चतुर्थी व्रत शुक्रवार को है। सुहागिनें निराजल व्रत रखकर अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी। शिवालयों और गणेश मंदिरों में पूजन के साथ करवा माता की कथा का श्रवण करेंगी। चंद्रोदय रात 8:03 बजे होगा। चलनी की ओट से चांद के दर्शन के बाद उनका व्रत पूरा होगा।
उधर, बृहस्पतिवार को उन्होंने करवा, करवा माता की तस्वीर, दीया, लाल-पीले रंग के कपड़े, मेहंदी और शृंगार की सामग्रियां खरीदीं। शृंगार प्रसाधन की दुकानों पर मेहंदी लगवाने के लिए भीड़ लगी रही। हिंदू सनातन धर्म में पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक मास की विशेष महिमा है।
इसे भी पढ़ें; नक्कटैया: लाग विमान में दिखेगी ऑपरेशन सिंदूर, ट्रंप टैरिफ की झांकियां; टूटे तार और सड़कों को ठीक किया जा रहा
इस महीने की शुरुआत करवा चौथ और गजानन की आराधना से होती है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ (करक चतुर्थी) का व्रत पड़ता है। सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य का संकल्प लेकर व्रत रखेंगी। वामनपुराण में करवा चौथ के व्रत की कथा का वर्णन है।
करवा चौथ पर बन रहे ये खास योग
मेहंदी लगवाती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
पूजा का ये है विधान
करवा चौथ पर पूजा की थाली में जल से पूरित करवा रखा जाता है। थाली सोने, चांदी, पीतल या मिट्टी की होनी चाहिए। इस थाली में श्रृंगार की वस्तुएं रखकर व्रती महिलाएं परंपरानुसार पूजा करेंगी। चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देकर आरती व पूजा करेंगी।
कथा श्रवण के साथ करेंगी थाली परिक्रमा
करवा चौथ की पूजा घरों, मंदिरों के अलावा कुंडों और कॉलोनियों में भी होगी। सिंधी, मारवाड़ी और पंजाबी बहुल कॉलोनियों में महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा करेंगी। रमनदीप कौर ने बताया कि करवा माता की कथा श्रवण के दौरान थाली की परिक्रमा कराई जाती है। इसमें सुहागिन एक-दूसरे को थाली देकर घुमाती हैं।