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Karwa Chauth 2025: सास की सरगी से व्रत की शुरुआत, करवे के जल से पूरा; तैयारी में जुटी महिलाएं

Thu, 09 Oct 2025 04:26 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Karwa Chauth 2025: करवा चौथ की तैयारियों में महिलाएं जुट गई हैं। करवा चौथ के व्रत की शुरुआत सास की सरगी से होगी। पंजाबी, सिंधी और मारवाड़ी समाज की सुहागिन परंपरानुसार महिलाएं भगवान शिव, पार्वती व गणेश जी की भी पूजा करेंगी। 
 
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करवा चौथ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रेम, समर्पण और विश्वास का उत्सव करवाचौथ 10 अक्तूबर को है। सुहागिन पति की पति की दीर्घायु की कामना के लिए दिनभर निराजल व्रत रखेंगी। सुहागिन इसको लेकर तैयारी में जुट गई हैं। मारवाड़ी, पंजाबी और सिंधी समुदायों की सुहागिन भी अपनी परंपरानुसार उल्लास के साथ मनाती हैं। करवा माता की पूजा और कथा का श्रवण करेंगी। सास उनको सरगी देती हैं तो बहुएं उनकी आंचल में सात तरह की सामग्री और पैसा देकर आशीर्वाद लेती हैं।

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मारवाड़ी: परंपरा में सादगी में सजी भक्ति
मारवाड़ी संस्कृति में भी करवाचौथ पर्व मनाया जाता है। स्मिता लोहिया ने बताया कि सुहागिन इस दिन भोर में सास अपनी बहू को सरगी में सूखे मेवे, हलवा, फल और मिठाई, कपड़े आदि देंगी। फिर दिनभर निराजल व्रत रखकर शाम को सोलह शृंगार कर भगवान शिव, पार्वती, गणेश और चंद्रदेव की पूजा करेंगी। करवा चौथ की कथा सुनेंगी। चांद निकलने के बाद चलनी से चांद देखकर चलनी से ही अपने पति का चेहरा देखकर व्रत तोड़ती हैं। पति अपनी पत्नी को पानी और मिठाई खिलाकर व्रत तोड़ती हैं।

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पंजाबी: पारंपरिक परिधान, गहने और चूड़े से करेंगी शृंगार
सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को सरगी देंगी। जिसमें मठरी, फेनी, सूखे मेवे और नारियल आदि रहेगा। सिमरन कौर और नीरू चढ़ढा ने बताया कि सरगी खाने के बाद दिनभर व्रत रखेंगी। महिलाएं पारंपरिक परिधानों और गहने और चूड़े पहनेंगी। महिलाएं मुहल्लों में एकत्रित होकर करवा, दीपक, चावल, हल्दी-कुमकुम और मिठाई आदि चढ़ाकर पूजा करेंगी। माता की पूजा और करवे के जल से चंद्रदेव को अर्घ्य देने के बाद मठरी और करवे के जल से व्रत को तोड़ेंगी।
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सिंधी: शगुन के रूप में सास देती हैं आशीर्वाद
सिंधी समाज की महिलाएं भी सास से मिले सरगी में सात तरह के व्यंजनों को खाएंगी। भोर में दुधफेनी का खीर, मेवा, फल, मिठाई आदि ग्रहण करती हैं।पूजा लखमानी ने बताया कि सरगी लेने के बाद दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को करवा चौथ माता की पूजा करेंगी। सिंधी परंपरा में ‘करवा मातो की अरदास’ कहा जाता है। महिलाएं मिट्टी या पीतल के करवे में जल भरकर माता को अर्पित करेंगी औ मंगल गीत गाएंगी। चांद अर्घ्य देने के बाद व्रत तोड़ेंगी। फिर सास को सात तरह के खाद्य सामग्री कपड़े व पैसा देकर उनका आशीर्वाद लेंगी।
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