प्रो. के शशि कुमार
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दक्षिण भारत का प्राचीन कर्नाटक संगीत। ढाई हजार वर्ष पहले जन्मी ये शैली सबसे पुरानी और धनी मानी जाती है। बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के प्रो. के शशि कुमार संगीत के इस शैली के उम्दा फनकार हैं।
दक्षिण में जन्मे, वहीं से शिक्षा दीक्षा ली और अब उत्तर भारत में इसकी जड़ मजबूत कर रहे हैं। करीब तीस से अधिक समय से प्रो. शशि बीएचयू से जुड़े हैं और संगीत की इस शैली को संगीत कलासाधकों में सिंचित करने का काम कर रहे हैं। विदेशों में कई वर्कशाप के जरिये भी संगीत की इस शैली को आगे बढ़ा रहे हैं।
अमर उजाला से बातचीत में प्रो. शशि कहते हैं शास्त्रीय संगीत दो धारा है, एक हिंदुस्तानी और दूसरा कर्नाटक संगीत। 13वीं शताब्दी तक दोनों एक ही थे लेकिन 17वीं शताब्दी में हिंदुस्तानी संगीत के रूप में ध्रुपद, ख्याल उत्तर भारत में बढ़ने लगा और कर्नाटक संगीत दक्षिण में।
दोनों संगीत में फर्क बस स्वर के लगाव का है। बनारस में अकेले कर्नाटक संगीत को आगे लेकर चल रहे प्रो. शशि बताते हैं कि कर्नाटक संगीत को लेकर यहां लोगों में रुचि है। हर साल करीब 15-20 विद्यार्थी ये संगीत सीख रहे हैं और वो उत्तर भारत से ही जुड़े हैं। कई विदेशियों की भी इसमें रुचि है वो इसे सीख रहे हैं।