शहीद के नाम पर केराकत-सुल्तानपुर देवगांव मार्ग का नाम रखने, उनकी प्रतिमा स्थापित करने और शहीद परिजन को पेट्रोल पंप देने आदि की घोषणाओं पर अमल नहीं हो सका। बीस वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक किसी भी राजनेताओं और अधिकारियों ने पलटकर शहीद परिजनों का हाल जानने का प्रयास नहीं।
हालांकि मदद के नाम पर दस बीघा जमीन दी गई, जो नाले में है। शहीद के पिता सत्यनारायन सिंह का कहना है कि जो जमीन प्रशासन ने उपलब्ध कराई है। वह सिर्फ कागजों में है। मौके पर जमीन का कोई भू उपयोग नहीं हो सकता।