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कारगिल दिवस स्पेशल : भारतीय सेना में शामिल होकर शहीद की पत्नी कर रही पति के सपनों को पूरा

Wed, 24 Jul 2019 09:39 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
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शहीद की पत्नी मीना (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला
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कारगिल युद्व में 1999 में सीमा पर चल रही जंग में भारतीय सेनाओं के जवानों ने अपने बहादुरी का परिचय देकर पाकिस्तान के सैनिकों को मारकर भगाने में जो फतह हासिल की थी। उस वीर जवानों में एक नाम केराकत तहसील के अकबरपुर निवासी जगदीश सिंह भी थे। जिन्होंने अपनी शहादत दी थी। शहीद की पत्नी मीना सिंह अपने पति शहीद जगदीश सिंह के सपनों को साकार करने के लिए भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा में जुटी हुई हैं।

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केराकत-सुल्तानपुर देवगांव मार्ग पर स्थित अकबरपुर गांव के सत्यनारायन सिंह के पुत्र शहीद जगदीश सिंह ने जो शहादत देकर इतिहास के पन्नों में अपनी शहादत दर्ज कराई है। उस पर शहीद परिवार को ही नहीं पूरे गांव वाले अपने इस लाडले की शहादत के दिन को याद कर उनकी शहादत पर बड़ा गर्व महसूस करते हैं।

पिता श्याम नारायन सिंह 90 वर्ष की आंखे बेटे को याद कर अक्सर 26 जुलाई को नम हो जाती हैं लेकिन वे सिर अपना उंचा कर कहते हैं कि बेटे ने जो देश के लिए कुर्बानी दी है। उस पर मुझे नाज है। जब कारगिल जंग में शहादत की सूचना गांव अकबरपुर में पहुंची तो कोहराम मच गया और पूरा गांव गम में डूब गया। उस समय सांत्वना देने कुछ जनप्रतिनिधि, शासन, प्रशासन के अधिकारी शहीद के घर पहुंच गए। कई तरह की सुविधाओं का पिटारा खोलकर शीघ्र उपलब्ध कराने की घोषणाएं कर दी। लेकिन आज तक पूरा नहीं हो पाईं।

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शहीद के नाम पर केराकत-सुल्तानपुर देवगांव मार्ग का नाम रखने, उनकी प्रतिमा स्थापित करने और शहीद परिजन को पेट्रोल पंप देने आदि की घोषणाओं पर अमल नहीं हो सका। बीस वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक किसी भी राजनेताओं और अधिकारियों ने पलटकर शहीद परिजनों का हाल जानने का प्रयास नहीं।

हालांकि मदद के नाम पर दस बीघा जमीन दी गई, जो नाले में है। शहीद के पिता सत्यनारायन सिंह का कहना है कि जो जमीन प्रशासन ने उपलब्ध कराई है। वह सिर्फ कागजों में है। मौके पर जमीन का कोई भू उपयोग नहीं हो सकता।
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