काशी की सड़कों पर बोल बम और हर हर महादेव के गगनभेदी जयकारे गूंजने लगे हैं। कंधे पर रंग-बिरंगी कांवर लिए भोलेनाथ के भक्तों का रेला आस्था पथ पर उमड़ पड़ा है। भोले की नगरी में अब हर तरफ गेरुआ वस्त्र पहने कांवरिये नजर आने लगे हैं। चितरंजन पार्क और सिंधी धर्मशाला के शिविरों में शनिवार को दिन भर कांवरियों की भीड़ लगी रही। हजारों कांवरिए गंगा जल लेकर बैजनाथ धाम के लिए रवाना हुए। इस बार सावन में बाबा के जलाभिषेक के लिए 15 लाख से अधिक भक्तों के काशी पहुंचने का अनुमान है। 25 जुलाई को सावन के प्रथम सोमवार के जलाभिषेक की तैयारियां ली गई हैं।
बाबा विश्वनाथ की नगरी में कांवरियों का रेला उमड़ने के साथ ही शिविरों में सेवादारों ने जिम्मा संभाल लिया है। सावन सोमवार के प्रथम जलाभिषेक के लिए देश के कोने-कोने से भक्त काशी का रुख करने लगे हैं। हनुमान घाट, शिवाला के सभी मठ, धर्मशालाएं पैक हो गई हैं। होटलों में जगह नहीं है। दशाश्वमेध, लक्सा के होटल, धर्मशालाओं का भी यही हाल है।
चितरंजन पार्क के शिव शक्ति कांवरिया भक्त तीर्थयात्री सेवा शिविर में कांवर रखने की जगह नहीं बच रही है। इसी तरह लक्सा के सिंधी धर्मशाला में में भी सैकड़ों कांवरियों ने पड़ाव डाल दिया है। शिविर में भक्तों के खाने, ठहरने के इंतजाम हैं। इस समिति के उपाध्यक्ष राजेश शुक्ला ने बताया कि भीड़ अधिक होने पर मारवाड़ी सेवा संघ के भवन में भी भक्तों का ठहराव कराया जाएगा। रथयात्रा पर काशी कांवरिया शिविर में भी भक्तों का ख्याल रखा जाएगा। शिविर के संचालक गोपाल सिंह तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।