गुरुवार को जगतगुरु कांची शंकराचार्य महाराज ने बाबा विश्वनाथ से लोक कल्याणार्थ काशी में चातुर्मास करने की अनुमति ली। बाबा का विधि विधान से पूजन अर्चन करने के साथ ही विविध धार्मिक अनुष्ठान कार्य करने का संकल्प लिया। शंकराचार्य ने बाबा विश्वनाथ का षोडशोपचार पूजन और विशेष रुद्राभिषेक किया।
कांची कामकोटिपीठ के शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने बाबा विश्वनाथ से अनुमति लेकर काशी में 88 दिनों के चातुर्मास की शुरुआत की। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव... के जयघोष से गूंज रहा था। बाबा विश्वनाथ के धाम में शंकराचार्य के स्वागत के लिए संत समाज के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही।
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गुरुवार को जगतगुरु कांची शंकराचार्य महाराज ने बाबा विश्वनाथ से लोक कल्याणार्थ काशी में चातुर्मास करने की अनुमति ली। बाबा का विधि विधान से पूजन अर्चन करने के साथ ही विविध धार्मिक अनुष्ठान कार्य करने का संकल्प लिया। शंकराचार्य ने बाबा विश्वनाथ का षोडशोपचार पूजन और विशेष रुद्राभिषेक किया। बाबा को स्वर्ण अर्पण के साथ 108 रजत बेल पत्र चढ़ाया। 45 मिनट तक विधि-विधान से पूजन अर्चन व चातुर्मास व्रत संकल्प के उपरांत ज्ञानवापी कुएं का जल ग्रहण कर नंदी को पूजा।
शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने कहा कि काशी लघु भारत का स्वरूप है। यहां सभी तरह के संस्कार व संस्कृति के लोग वास करते हैं। यहां से निकला संदेश भारत ही नहीं विश्व को जाता है। तिरुपति बालाजी में दर्शन के बाद अनुभूति हुई कि काशी में ही इस वर्ष लोक कल्याणार्थ चतुर्मास व्रत संकल्प किया जाए। मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा ने अगवानी की। उनके साथ न्यास के सदस्य पंडित दीपक मालवीय, पंडित वेंकट रमण घनपाठी, बीएस सुब्रमण्यम (मणि जी) व बीएस चंद्रशेखर चंद्रू मौजूद थे। विश्वनाथ मंदिर से वापस आने के बाद मठ में वापसी पर भगवती त्रिपुर सुंदरी चंद्रमौलिश्वर जी महाराज सहित अन्य देवी-देवताओं का पूजन अर्चन किया।