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कल्पवास: काशी से तीर्थराज जाएंगे संत, इतिहास में पहली बार अमृत स्नान की तर्ज पर पर्व स्नान; जानें खास

Sat, 06 Dec 2025 06:09 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Kalpwas 2026: माघ मेले की शुरूआत तीन जनवरी 2026 को पौष पूर्णिमा के साथ होगी। मौनी अमावस्या का स्नान 18 जनवरी, वसंत पंचमी का स्नान एक फरवरी और महाशिवरात्रि का स्नान 15 फरवरी को होगा।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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Varanasi News: प्रयागराज की धरती पर कल्पवास के लिए काशी से श्रद्धालुओं की टोली जाएगी। काशी के मठ-मंदिरों के संत, महंत, पीठाधीश्वर, श्रीमहंत और दंडी संन्यासियों ने भी कल्पवास की तैयारियां शुरू कर दी हैं। जमीन का आवंटन होने के बाद प्रयागराज की धरती पर लघु काशी भी आकार लेगी।

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महाकुंभ के बाद पड़ने वाले माघ स्नान की भव्यता भी श्रद्धालुओं को नजर आएगी। माघ मेले के इतिहास में पहली बार अमृत स्नान की तर्ज पर पर्व स्नान होगा। पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ ही कल्पवास शुरू हो जाएगा। काशी से धर्मसंघ पीठाधीश्वर प्रयागराज में कल्पवास के लिए जाएंगे। वह एक महीने तीन दिन तक प्रयागराज में कल्पवास करेंगे और त्रिजटा स्नान के बाद लौटेंगे।

धर्मसंघ के महामंत्री जगजीतन पांडेय ने बताया कि इस बार माघ स्नान के लिए धर्मसंघ का शिविर लगेगा। जमीन के आवंटन के बाद शिविर लगाने का काम शुरू हो जाएगा। देश भर से श्रद्धालु कल्पवास के लिए शिविर में पधारेंगे। खाक चौक के प्रधानमंत्री जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा ने बताया कि माघ मेले का सबसे प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी माना जाता है। इस बार अमृत स्नान की तर्ज पर माघ मेले में पहली बार पर्व स्नान होगा।

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काशी के संतों का होगा जमावड़ा

जगद्गुरु, रामानंदाचार्य, महामंडलेश्वर, द्वाराचार्य, संत, महंत, श्रीमहंत की शोभायात्रा पर्व स्नान के लिए निकलेगी। माघ मेले में होने वाले पर्व स्नान का नजारा महाकुंभ के शाही स्नान की तरह ही होगा। जो भी श्रद्धालु महाकुंभ के अमृत स्नान में शामिल नहीं हो सके थे, उनके लिए पर्व स्नान में शामिल होने का मौका रहेगा। शैव, वैष्णव और शाक्त संप्रदाय के मठ मंदिरों के साधु-संतों का तीर्थराज की धरती पर जमावड़ा होगा।

माघ मेला के स्नान पर्व
तीन जनवरी 2026 - पौष पूर्णिमा
14 जनवरी 2026 - मकर संक्रांति
18 जनवरी 2026 - मौनी अमावस्या
23 जनवरी 2026 - वसंत पंचमी
एक फरवरी 2026 - माघी पूर्णिमा
15 फरवरी 2026 - महाशिवरात्रि
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कल्पवास से होती है पंच तत्वों की शुद्धि
धर्मसंघ पीठाधीश्वर शंकर देव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने बताया कि पंचतत्व से बने इस शरीर को शुद्ध करने के लिए ही माघ मेले में श्रद्धालु पूरे माह रहकर त्रिवेणी में स्नान, ध्यान, जप तप करते हैं। संगम की रेती पर नियम-संयम से रहने वाले श्रद्धालुओं के शरीर का कायाकल्प होता है तो मन और बुद्धि भी पवित्र होती है। वानप्रस्थ आश्रम से पहले कल्पवास का महत्व है। 

कल्पवास के दौरान श्रद्धालु मोह–माया से दूर रहते हैं और संन्यासियों की तरह रोज त्रिवेणी में दोनों समय स्नान और एक समय भोजन करते हैं। कल्पवास में कुछ लोग मनोकामना की पूर्ति के लिए आते हैं तो कुछ लोग कायाकल्प व मुक्ति के लिए। मान्यता है कि कल्पवासी जिस भाव से कल्पवास करने आता है, उसकी मन्नत पूरी होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि कल्पवास का एक माह पूरे जीवन की नकारात्मकता को दूर कर मन को स्थिर करता है।
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