जगद्गुरु, रामानंदाचार्य, महामंडलेश्वर, द्वाराचार्य, संत, महंत, श्रीमहंत की शोभायात्रा पर्व स्नान के लिए निकलेगी। माघ मेले में होने वाले पर्व स्नान का नजारा महाकुंभ के शाही स्नान की तरह ही होगा। जो भी श्रद्धालु महाकुंभ के अमृत स्नान में शामिल नहीं हो सके थे, उनके लिए पर्व स्नान में शामिल होने का मौका रहेगा। शैव, वैष्णव और शाक्त संप्रदाय के मठ मंदिरों के साधु-संतों का तीर्थराज की धरती पर जमावड़ा होगा।
माघ मेला के स्नान पर्व
तीन जनवरी 2026 - पौष पूर्णिमा
14 जनवरी 2026 - मकर संक्रांति
18 जनवरी 2026 - मौनी अमावस्या
23 जनवरी 2026 - वसंत पंचमी
एक फरवरी 2026 - माघी पूर्णिमा
15 फरवरी 2026 - महाशिवरात्रि
कल्पवास से होती है पंच तत्वों की शुद्धि
धर्मसंघ पीठाधीश्वर शंकर देव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने बताया कि पंचतत्व से बने इस शरीर को शुद्ध करने के लिए ही माघ मेले में श्रद्धालु पूरे माह रहकर त्रिवेणी में स्नान, ध्यान, जप तप करते हैं। संगम की रेती पर नियम-संयम से रहने वाले श्रद्धालुओं के शरीर का कायाकल्प होता है तो मन और बुद्धि भी पवित्र होती है। वानप्रस्थ आश्रम से पहले कल्पवास का महत्व है।
कल्पवास के दौरान श्रद्धालु मोह–माया से दूर रहते हैं और संन्यासियों की तरह रोज त्रिवेणी में दोनों समय स्नान और एक समय भोजन करते हैं। कल्पवास में कुछ लोग मनोकामना की पूर्ति के लिए आते हैं तो कुछ लोग कायाकल्प व मुक्ति के लिए। मान्यता है कि कल्पवासी जिस भाव से कल्पवास करने आता है, उसकी मन्नत पूरी होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि कल्पवास का एक माह पूरे जीवन की नकारात्मकता को दूर कर मन को स्थिर करता है।