पं. रविशंकर मिश्र और डॉ. ममता टंडन ने कथक प्रस्तुत करते हुए देवी स्तुति या देवी सर्वभूतेषु... और राधा-कृष्ण के भजनों पर मनमोहक नृत्य पेश किया। इनके साथ तबले पर भोलानाथ मिश्र व अवंतिका महाराज और हारमोनियम व गायन पर विशाल मिश्रा ने संगत की। वहीं, बाल कलाकार समर्थ मिश्रा व रुद्राक्ष पाठक ने सितार-तबले की जुगलबंदी से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। रात्रि के संगीत सत्र में विभिन्न भजन व लोक गायकों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
डॉ. विजय कपूर ने काली मैया तिहारी इच्छा से हम द्वार तुम्हारे आए हैं..., लोक गायिका ज्योति माही ने मां तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा..., बक्सर की अर्चना तिवारी ने बनल रहे नैहरवा ससुरवा ए काली माई... और साहित्यकार अरविंद मिश्रा ने काली मां को आज पत्र लिखूंगा... की प्रस्तुति दी।
इसके अलावा बाल कलाकार यथार्थ दुबे, जय चौरसिया, ओम तिवारी, पुनीत जेटली पागल बाबा, लोक गायक गोविंद गोपाल और नीरज पांडेय ने देवी गीतों व भजनों से हाजिरी लगाई। साथ ही संस्कृति शर्मा और राजा झांकी ने शिव-पार्वती प्रसंग पर भाव नृत्य प्रस्तुत किया। संगत कलाकारों में तबले पर पं. बलराम मिश्रा व मोती शर्मा, ढोलक पर विशाल व शनि, कीबोर्ड पर नीरज पांडेय, बैंजो पर जियाराम और पैड पर राहुल व विवेक ने भूमिका निभाई।