फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर बृहस्पतिवार को कालाष्टमी मनाई गई। भैरव मंदिरों में शृंगार हुआ। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर दर्शन-पूजन किया। रात तक दर्शन के लिए भीड़ रही। बाबा कालभैरव मंदिर में दर्शन के लिए विश्वेश्वरगंज चौराहे तक कतार लगी थी।
कालभैरव मंदिर में बाबा का पंचामृत स्नान कराकर विविध नैवेद्य अर्पित कर शृंगार हुआ। सविधि पूजा और आरती हुई। बाबा को विविध प्रकार के फल, मिष्ठान आदि का भोग लगा। मंगला आरती से रात तक दर्शन के लिए कतार लगी रही। कज्जाकपुरा स्थित लाट भैरव का अद्भुत शृंगार हुआ। नवीन वस्त्राभूषण में त्रिपुंडधारी बाबा लाट भैरव को कई प्रकार की मालाओं से सजाया गया था। न्यायाधीश बाबा लाटभैरव के दरबार में श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया।
श्रीकपाल भैरव अथवा लाट भैरव प्रबंधक समिति की ओर से पाक्षिक अष्टमी पूजन के दौरान आचार्य रविंद्र त्रिपाठी के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनुष्ठान हुआ। मंदिर में श्रीगणेश, नवग्रह व काली पूजन के बाद बाबा लाटभैरव की पूजा हुई। अष्ट भैरव, प्रिय वाहन स्वान सहित कपाल मोचन कुंड व भैरवी कूप आदि का भी शृंगार कर राग-भोग अर्पित किया गया। रात में हजारे दीपक से आरती उतारी गई। पूजन में समिति के अध्यक्ष रोहित जायसवाल, मुन्नालाल यादव, शिवम अग्रहरि आदि शामिल रहे।