बाल अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि जब तक देश के हरेक बच्चे को भरपेट भोजन और अच्छी शिक्षा नहीं मुहैया होगी, विकास की परिकल्पना बेमानी है। सत्यार्थी ने कहा कि बच्चों को पढ़ने और खेलने दोनों की आजादी मिलनी चाहिए। ये बातें उन्होंने कछवारोड स्थित एक विद्यालय में आयोजित समारोह में कहीं। इससे पहले सोमवार की सुबह इंडिगो की फ्लाइट 6 ई 306 से दिल्ली से बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचे कैलाश का जोरदार स्वागत हुआ।
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश ने एयरपोर्ट पर मीडिया से दूरी बनाए रखी। टर्मिनल से बाहर निकलते ही वहां पहले से मौजूद लोगों ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया। उनके स्वागत में स्कूली बच्चे भी वहां कतारबद्ध होकर खड़े थे। कैलाश बच्चों से मिले और उनकी पढ़ाई के बारे में भी पूछा। एयरपोर्ट पर अवधेश सिंह, विनीत सिंह मुन्ना, विमलेश चौबे, बाबूलाल पटेल आदि ने स्मृति चिह्न और बुके देकर
सत्यार्थी का स्वागत किया। कैलाश यहां से सीधे कछवां के लिए रवाना हो गए। उधर, कछवां रोड संवाददाता के अनुसार बलवंती देवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित समारोह में बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश का भव्य स्वागत किया गया। यहां कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में बच्चों की बड़ी भूमिका है। एक अनुशासित राष्ट्र की परिकल्पना तभी साकार होगी जब बच्चों को भोजन, पढ़ने और खेलने का अधिकार मिलेगा। बाल श्रम पर पूरी तरह से रोक लगाए बगैर बाल
अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। विद्यालय के प्रबंधक दिलीप पटेल और प्रधानाध्यापक राजीव पटेल ने स्मृति चिह्न भेंट कर सत्यार्थी का स्वागत किया। विद्यालय के छात्र विष्णु मोदनवाल ने सत्यार्थी को यथार्थ गीता की प्रति भेंट की। इस मौके पर स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। समारोह में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, छात्रों के अभिभावक और विद्यालय के शिक्षक मौजूद थे।