किशोर न्याय अधिनियम का उल्लेख
न्यायालय ने अपने निर्णय में किशोर न्याय अधिनियम का उल्लेख किया। न्यायालय ने कहा कि इस अधिनियम के अनुसार किसी भी किशोर को मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा नहीं दी जा सकती। हालांकि, एक अबोध बालिका के साथ हुए इस गंभीर अपराध में अधिकतम अनुमन्य दंड देकर ही न्याय की मंशा पूरी की जा सकती है। अदालत ने अपचारी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 40 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय ने यह भी कहा कि अर्थदंड अदा करने का मुख्य दायित्व किशोर अपचारी के माता-पिता पर होगा। अदालत ने आदेश दिया कि जमा किए गए अर्थदंड का 50 प्रतिशत यानी 20 हजार रुपये पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिए जाएं। इसके अतिरिक्त न्यायालय ने किशोर के पुनर्वास के लिए भी निर्देश दिए हैं। जिला परिवीक्षा अधिकारी को उसकी व्यक्तिगत देखभाल योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।