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Varanasi News: पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म, किशोर पर चला वयस्क की तरह मुकदमा; 20 साल के कारावास की सजा

Fri, 07 Aug 2026 01:59 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी में पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में किशोर पर वयस्क की तरह मुकदमा चला। कोर्ट ने उसे 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : adobestock
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विस्तार
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विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) नितिन पांडेय की अदालत ने लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र में पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में बाल अपचारी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस किशोर का विचारण वयस्क की तरह किया गया था। विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह ने बताया कि अदालत ने आरोपी किशोर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2) (पूर्व में आईपीसी की धारा 376एबी) और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया।

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अभियोजन के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 26 मार्च 2021 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनकी पांच वर्षीय बेटी के साथ रिश्ते में चाचा लगने वाले 16 वर्षीय किशोर ने दुष्कर्म किया। किशोर बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने सुनसान स्थान पर ले गया था। घटना के बाद बच्ची लहूलुहान अवस्था में रोते हुए घर लौटी थी। किशोर न्याय बोर्ड ने अपनी जांच में पाया कि किशोर अपराध के परिणामों को समझने की मानसिक क्षमता रखता है। 

न्यायालय के समक्ष अपराध सिद्ध करने के लिए छह महत्वपूर्ण साक्षियों की गवाही कराई गई। इनमें पीड़िता के माता-पिता, चिकित्सक, विवेचक और प्राथमिकी लिखने वाले पुलिसकर्मी शामिल थे। गवाहों के सुदृढ़ बयानों और चिकित्सकीय रिपोर्ट ने अभियोजन पक्ष के दावे का समर्थन किया। प्रभावी पैरवी के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।

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किशोर न्याय अधिनियम का उल्लेख
न्यायालय ने अपने निर्णय में किशोर न्याय अधिनियम का उल्लेख किया। न्यायालय ने कहा कि इस अधिनियम के अनुसार किसी भी किशोर को मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा नहीं दी जा सकती। हालांकि, एक अबोध बालिका के साथ हुए इस गंभीर अपराध में अधिकतम अनुमन्य दंड देकर ही न्याय की मंशा पूरी की जा सकती है। अदालत ने अपचारी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 40 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय ने यह भी कहा कि अर्थदंड अदा करने का मुख्य दायित्व किशोर अपचारी के माता-पिता पर होगा। अदालत ने आदेश दिया कि जमा किए गए अर्थदंड का 50 प्रतिशत यानी 20 हजार रुपये पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिए जाएं। इसके अतिरिक्त न्यायालय ने किशोर के पुनर्वास के लिए भी निर्देश दिए हैं। जिला परिवीक्षा अधिकारी को उसकी व्यक्तिगत देखभाल योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
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