अपने बयानों से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मारकंडेय काटजू के गाय को लेकर दिए गए बयान से नया विवाद खड़ा हो गया है। आईआईटी बीएचयू में एक कार्यक्रम में आमंत्रित जस्टिस काटजू ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि घोड़ा और कुत्ते की तरह गाय भी एक जानवर है। मैं उसे मां नहीं मानता। आखिर कोई यह तो बताए कि एक जानवर इंसान की मां कैसे हो सकती है।
प्रेस कौंसिल के चेयरमैन रह चुके जस्टिस काटजू ने कहा कि अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में लोग गोमांस खाते हैं तो क्या वहां प्रतिबंध लगा दिया गया है। राजनेता किसी की इच्छाओं को रोकने वाले कौन होते हैं। कहा कि गाय को मां बताना बेवकूफी की बातें हैं। लोगों में अक्ल नहीं है। मैं गोमांस खाता हूं और आगे भी खाता रहूंगा। मुझे कोई नहीं रोक सकता। दादरी की घटना पर
पूछे गए सवाल के जवाब में जस्टिस काटजू ने कहा कि दादरी जैसी घटनाएं राजनीतिक लोगों की शिकार हो जाती हैं। देश के नेता निकम्मे, नीच और चोर हैं। ऐसे नेताओं को फांसी दे देनी चाहिए। दादरी की घटना की निंदा होनी चाहिए। निरीह लोगों को पकड़कर मारने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। मगर राजनेता वहां वोट की राजनीति कर रहे हैं और जनता को बरगला रहे हैं। नेताओं ने देश को लूट लिया है। इन लुटेरों को फांसी होनी चाहिए।
जस्टिस काटजू को छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा। सेमिनार हाल के बाहर गाय को लेकर दिए गए बयान से नाराज छात्रों ने काटजू के खिलाफ नारे भी लगाए। वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों को खदेड़ा। विवाद की आशंका को देखते हुए सेमिनार स्थल पर तीना थानों की फोर्स भी बुला ली गई।