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Varanasi News: न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने अपने फैसलों में लागू किया ‘प्ली बारगेनिंग’ का सिद्धांत

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-छोटे मामलों में पीड़ित को समझौते के तहत मुआवजा दिलाकर सैकड़ों अपीलें निस्तारित कीं
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अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने अपने फैसलों में ‘प्ली बारगेनिंग’ का सिद्धांत लागू किया। इसके चलते इन्होंने अपने कार्यकाल में सैकड़ों अपीलें निस्तारित कीं। इससे उनकी न्यायालय में एक अलग पहचान बन गई थी। वह अंग्रेजी व हिंदी में आदेश लिखने के लिए भी जाने जाते थे।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार ने बताया कि गिरिधर मालवीय जी को उनके पिता न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त भाई की तरह मानते थे। पिता जी 1977 में और गिरिधर मालवीय जी 1988 में जज बने। उन्होंने अमेरिकन न्याय प्रणाली ‘प्ली ऑफ बारगेनिंग जस्टिस’ का सिद्धांत फौजदारी की अपीलों में लागू किया। इसके तहत फौजदारी के छोटे मामलों की अपीलों में दोनों पक्षों से बात कर सजा को अर्थदंड में परिवर्तित कर पीड़ित को मुआवजा दिलाकर बड़ी संख्या में अपीलें निस्तारित कीं।
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वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मपाल सिंह ने बताया कि वह कभी किसी पर गुस्सा नहीं करते थे। नए वकीलों से भी अच्छे से बात करते थे। मिलनसार और मधुर व्यवहार के चलते उनकी न्यायालय में एक अलग पहचान थी। वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी सिंह ने कहा कि गिरिधर मालवीय संपूर्ण व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने गंगा प्रदूषण से संबंधित कई मामलों की सुनवाई की। इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंह ने बताया कि गिरिधर मालवीय जी ने अंग्रेजी के साथ ही हिंदी में भी कई आदेश दिए हैं। हिंदी को बढ़ावा देने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। न्यायमूर्ति के रूप में वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं को एक समान रूप से अपना पक्ष रखने का मौका देते थे।
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वहीं, अधिवक्ता शशिशेखर मिश्रा ने बताया कि गिरिधर जी ‘मालवीय मिशन’ के संरक्षक मंडल में थे। वे स्वच्छता अभियानों को आमजन से जोड़ने के लिए व राष्ट्रीय धरोहरों को सुरक्षित, संरक्षित रखने को लेकर हमेशा प्रयासरत रहे।
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