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विपक्षी दलों के मोर्चे में राष्ट्रीय लोकदल अहम किरदार : जयंत चौधरी

Sun, 27 Aug 2017 05:07 PM IST
amarujala.com, written by प्रदीप मिश्र
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Jayant Chaudhary‏ - फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को इत्मीनान है कि गैरभाजपावाद की कड़ी में विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चा का स्वरूप गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव से पहले तय हो जाएगा।
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उनका यह भी मानना है कि इसके लिए कांग्रेस से लेकर सपा और बसपा के अलावा छोटे-छोटे दलों में भी माहौल बन रहा है। किसानों और युवाओं से जुड़े ज्यादातर मुद्दों पर आम राय है। देश की साझी विरासत को लेकर भी भ्रम नहीं है। फिर भी कुछ नए मुद्दे तलाशने और सहमति बनाने के साथ-साथ रणनीति बनाने लिए विपक्ष के नेता साथ बैठकर विचार कर रहे हैं।

जयंत कहते हैं- ‘हम इसमें अहम भूमिका निभाएंगे क्योंकि हमारे मुद्दे और विचार हमेशा स्पष्ट और यथावत रहे हैं।’ पूर्व सांसद चौधरी अपनी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल दुबे के साथ शनिवार को एक कार्यक्रम में शामिल होने काशी आए थे।
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इस दौरान उन्होंने ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत की। जानकारी दी कि रविवार को वह पटना में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू यादव की ‘भाजपा भगाओ-देश बचाओ’ रैली में हिस्सा लेंगे। 30 अगस्त को इंदौर में वरिष्ठ नेता शरद यादव की अगुवाई में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद गुजरात के वालसाड़ में किसानों की सभा में शामिल होंगे।

कहा- बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए देश-प्रदेश में भावनात्मक मुद्दे उछाले जा रहे हैं। असली खतरा यही है। कुछ विपक्षी दल इसे समझ गए हैं। मुकाबले के लिए मतभेद भुलाकर एक मंच पर आ रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें कांग्रेस की सकारात्मक हिस्सेदारी है। इसलिए नए मोर्चे-महागठबंधन का स्वरूप राष्ट्रीय होगा।
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यूपी का तो ब्रांड ही खराब हो गया

जयंत चौधरी - फोटो : SELF
प्रदेश में बेरोजगारी को सबसे बड़ी समस्या बताते हुए चौधरी कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सत्ता में आते ही एंटी रोमियो स्क्वाड बनाकर रोजगार के अवसर पैदा करने का मौका खो दिया है। प्रदेश की छवि इतनी खराब हो गई है कि उद्यमी यहां आने से पहले कई बार सोच रहे हैं।

उन्हें लगता है कि सरकार ने ही उन्हें बताया कि यूपी में नई उम्र के युवक तो दूसरी गतिविधियों में ही ज्यादा व्यस्त रहते हैं। मतलब, उन्हें अच्छे कर्मचारी नहीं मिलेंगे।

हार का मलाल नहीं, मुद्दे नहीं बदलेंगे विधानसभा चुनाव में बात न बन पाने से ‘दो लड़कों’ के साथ से अलग रहे चौधरी ने कहा- हमने कोशिश की। मंच बनाया। मुद्दे हमारे पास थे ही। गांव-गरीब और किसानों के मु्ददे पर हमारा वैचारिक दृष्टिकोण साफ है।

वैसे हम यूपी में कुछ ही समय सत्ता में रहे। तब हमने इस वर्ग के लिए कुछ न कुछ अच्छा किया। बेशक नतीजे हमारे पक्ष में नहीं रहे। हमें इसका मलाल नहीं है। सत्ता हमेशा नहीं रहती है। हम सवाल पूछना और संघर्ष करना जारी रखेंगे।
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