शिव की नगरी काशी में नटवर नागर के जन्मोत्सव का उल्लास तीसरे दिन भी छाया रहा। पातालपुरी मठ में बृहस्पतिवार को रोहिणी नक्षण में जन्मोत्सव का आयोजन किया गया। लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव की धूम रात भर रही। बृहस्पतिवार को रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में लड्डू गोपाल ने जन्म लिया। इसके पूर्व पूरा मठ परिसर भजन और गीतों की सुमधुर धुन से गुंजायमान होता रहा।
कलाकारों ने नंद के आनंद भयो जै कन्हैया लाल की...। बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके ब्रजबाला...। यशोमति मैया से बोले नंदलाला, राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला...समेत कई भजनों की मनोहारी प्रस्तुति की। मठ के महंत बालक दास महाराज के सानिध्य में जन्मोत्सव मनाया गया। इस दौरान मठ के बटुक और संन्यासी ही आयोजन के साक्षी बने। अष्टमी और रोहिणी का संयोग नहीं मिलने के कारण कृष्ण जन्माष्टमी तीन दिनों तक मनाई गई। बृहस्पतिवार को रोहिणी नक्षत्र का संयोग मिलने के कारण पातालपुरी मठ में कृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन हुआ।