मिली ये जानकारी
प्रशिक्षक रोशन कुमार ने बताया कि श्रमिकों को रोजाना सुबह 11 बजे से 4 बजे तक ट्रेनिंग दी जाती है। इसके लिए संस्था की ओर से बायोमेट्रिक अटेंडेंस ली जाती है। अगर किसी भी श्रमिक की अटेंडेंस 70 प्रतिशत से कम है तो वह टेस्ट में नहीं बैठ पाएगा। छह दिन की क्लास खत्म होने के बाद उनका टेस्ट लिया जाएगा, जो पास होगा उसी को आगे के दूसरे टेस्ट के लिए भेजा जाएगा। श्रमिकों की भाषाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, हर श्रमिकों को अंग्रेजी पढ़ने, बोलने और समझने की जानकारी दी जा रही है।
पहले जब श्रमिक दूसरे देश जाते थे तो उन्हें वहां की भाषा और मशीनों के बारे में सही जानकारी नहीं होती थी, जिसकी वजह से टेस्ट में पास नहीं हो पाते थे। इसको ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने पहली बार इस्राइल जाने वाले श्रमिकों की पढ़ाई और ट्रेनिंग आईटीआई में कराने का फैसला लिया है। ताकि लोगों को परेशानी न हो और वहां सही से काम कर सकें। नवंबर के अंतिम सप्ताह में श्रमिकों का टेस्ट भारत सरकार और इस्राइल के लोग लेंगे। जो उसमें पास होंगे वहीं नौकरी करने जा सकते हैं।
बोले अधिकारी
इस्राइल जाने वाले श्रमिकों को पहली बार पढ़ाने और ट्रेनिंग कराने का काम आईटीआई द्वारा किया जा रहा है। 800 श्रमिकों को ट्रेनिंग कराने का लक्ष्य है, जिससे उनको वहां कोई परेशानी न हो। - मुकेश कुमार सिंह, प्रधानाचार्य, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, करौंदी