वरुणा कॉरिडोर की योजना पर वरुणा की रक्षा से जुड़े संगठनों और नदी विशेषज्ञों के सवालों के बीच कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के अधिकारी सरकारी पैसे को और बर्बाद करने पर उतर आए हैं।
शासन इस पूरे मामले की जांच-पड़ताल करे और कोई कदम उठाए, इससे पहले ही उन्होंने 75 करोड़ रुपये और जारी करने की मांग भेज दी है। यह तब, जब कॉरिडोर में पक्का काम नहीं कराया जा रहा है। फिलहाल, नदी और तटों पर ड्रेजिंग और मिट्टी समतल करने का काम हो रहा है।
कहा जा रहा है कि मानसून से पहले कच्चे कामों पर रकम खपाने की मंशा से यह राशि मांगी गई है। अधिकारी चाहते हैं कि पैसा मिलने के बाद कुछ काम कराया जाएगा, कुछ नहीं। इस दौरान मिले धन को कच्चे काम पर कहीं भी खर्च दिखा दिया जाएगा।
गंगा में बाढ़ आने पर वरुणा में बाढ़ आ जाती है और तटवासियों के लिए भी यहां रहना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वहां कोई काम कैसे हो सकता है। पिछली बार बाढ़ के चलते 15 जुलाई से करीब ढाई महीने तक वरुणा कॉरिडोर का काम ठप था। कॉरिडोर का निर्माणाधीन ‘मॉडल’ और मशीनें पानी में डूब गई थीं।
कई महीने बाद इन मशीनों को निकाला जा सका था। तब पक्का काम अधिक होने से सिंचाई विभाग को अधिक नुकसान नहीं हुआ था लेकिन इस बार हालात अलग हैं। निर्माण सामग्री की किल्लत के चलते यहां हर तरह का पक्का काम रुका हुआ है।
डीएम बंगले से नक्खी घाट के बीच जेसीबी से नदी में ड्रेजिंग और तटों पर खुदाई का काम कराया जा रहा है। बारिश से पहले कॉरिडोर निर्माण के नाम पर ड्रेजिंग और खुदाई जैसे कार्यों में तेजी ला दी गई है। हालांकि सिंचाई विभाग के अभियंताओं का कहना है कि वह निर्धारित कार्ययोजना के तहत काम करा रहे हैं।
पिछली बार 200 करोड़ रुपये आए थे। उसमें 75 करोड़ रुपये खर्च नहीं होने के बाद शासन को वापस लौटाए गए थे। अब फिर से 75 करोड़ रुपये की डिमांड शासन को भेजी गई है।