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24 लाख के हेरफेर की जांच फाइलों में सिमटी

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वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में सुरक्षा के नाम पर हुए घोटाले की जांच फाइलों में ही सिमटी हुई है। सितंबर में मामला सामने आने के बाद जांच समिति तो बना दी गई, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। वहीं, विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया जारी है।
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विश्वविद्यालय में सुरक्षा एजेंसी को भुगतान में अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करते हुए 24 लाख से अधिक का भुगतान कर दिया था। इलाहाबाद की ऑडिट रिपोर्ट में मामला सामने आया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रो. राम किशोर त्रिपाठी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि सुरक्षा संविदा कर्मियों के भुगतान में वित्तीय नियमों और अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन किया गया। इसमें तत्कालीन विनयाधिकारी, सुरक्षाधिकारी, लेखानुभाग और सुरक्षा एजेंसी संलिप्तता है। कुलसचिव राजबहादुर ने बताया कि मामले की जांच लगभग हो चुकी है। जल्द ही इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई थी वित्तीय अनियमितता
ऑडिट विभाग इलाहाबाद के उपनिदेशक एसपी चौरसिया ने जांच रिपोर्ट में कहा था कि विश्वविद्यालय के लेखानुभाग की ओर सेवांछित अभिलेख मूलरूप में नहीं उपलब्ध कराए गए। ऐसे में सभी भुगतान का परीक्षण संभव नहीं हो सका। साक्ष्यों के आधार पर परीक्षण में भारी वित्तीय अनियमितताएं मिलीं। 11 अप्रैल 2016 से बांबे सिक्योरिटी कंसल्टेंसी एवं सर्विसेज मीरापुर की कंपनी को संविदा पर सुरक्षाकर्मियों के लिए नामित किया गया था। कंपनी की ओर से परीक्षा विभाग में रोजाना दो सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी दर्शाई गई लेकिन परीक्षा नियंत्रक के अनुसार केवल एक सुरक्षाकर्मी ही ड्यूटी पर रहता था। वहीं 13 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की एक दिन में दो या अधिक ड्यूटी दिखाई गई। उक्त सुरक्षाकर्मियों ने लिखित में दिया था कि उन्होंने एक ही शिफ्ट में ड्यूटी की थी। संविदा की शर्तों के अनुसार कोई भी सुरक्षाकर्मी 8 घंटे से अधिक की ड्यूटी नहीं कर सकता था बावजूद इसके सुरक्षा एजेंसी ने गलत जानकारी देकर भुगतान लिया।
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नहीं मिले कागजात
विश्वविद्यालय के लेखानुभाग की ओर से दिसंबर 2016, सितंबर 2017, अक्तूबर 2017 और मार्च 2017 से फरवरी 2018 तक के भुगतान से संबंधित कागजात उपलब्ध ही नहीं कराए गए। इसके कारण इनकी जांच नहीं हो सकी।
अनुबंध समाप्त होने के बाद भी 10 माह तक किया काम
सुरक्षा एजेंसी का अनुबंध 10 अप्रैल 2017 में समाप्त होने के बाद भी एजेंसी ने फरवरी 18 तक काम किया था। इसमें 21 मई 17 तक कुलपति की स्वीकृति से काम लिया जाना था। जबकि एजेंसी ने फरवरी 18 तक काम किया।
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