युवा कथक नर्तक आशीष सिंह नृत्य मंजरी दास ने कहा कि काशी से तालीम लेने के बाद भारतीय नृत्य को देश-दुनिया में पहुंचाना ही मेरा सपना है। आज विश्व नृत्य दिवस पर भी मेरा यही संदेश है कि कथक भारतीय धरोहर है, इसे बचाने की जरूरत है। इसके लिए गुरुओं के साथ शिष्यों को भी तन-मन से आगे आने की जरूरत है।
आशीष ने कहा कि आज बच्चों के माध्यम से ही कभी-कभी पाश्चात्य नृत्य पेश करवाएं जा रहे हैं। जबकि भारतीय नृत्य की कलाओं को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। अभिभावकों को भी चाहिए कि बच्चों को भारतीय नृत्य के बार में बताएं, उन्हें सिखाएं। उन्होंने कहा कि भारतीय नृत्य के लिए हम सभी को एकजुट होने की जरूरत है, यही हमारी संस्कृति है।
भरत नाट्यम नृत्य करने वाली काशी की डॉ. अलका गिरी नृत्य एक साधना की तरह देखती हैं। वह बताती हैं कि यह अमूल्य धरोह है, जिसे बढ़ाने का कार्य प्रत्येक कलाकार को करनी चाहिए। युवा पीढ़ी अच्छा तो कर रही है लेकिन कहीं न कहीं कुछ कमी है। इसे समझाने और सुधारने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि एक जमाना था, जब डांस में लोग अपना कॅरियर देखते थे। आज इसमें संघर्ष देखा जा रहा है। फ्यूजन डांस को एडाप्ट किया जा रहा है। शास्त्रीय नृत्य और इसकी कलाओं को एक मंच मिलना चाहिए। तभी हमारी पीढ़ी इसे आत्मसात करेगी और यह अनोखी कला आगे बढ़ेगी।
वाराणसी की कथक नृत्यांगना उर्वशी श्रीवास्तव अपनी मां को ही अपना गुरु मानतीं हैं, जो पंडित बिरजू महाराज की शिष्या रहीं हैं। वे मुंबई में रहकर इस भारतीय कला को आगे बढ़ा रही हैं। बनारस आते ही वे चहक उठती हैं। वे बताती हैं कि आज की पीढ़ी को गुरुओं से तन-मन से सीखने की जरूरत है।
वे कहती हैं कि पहले भी लोग इस कला में महिलाओं को आगे बढ़ाते थे, आज भी यही व्यवस्था है। लड़कियों को खुद आगे बढ़कर इस भारतीय कला को आत्मसात करने और इसे आगे बढ़ाने की इच्छा होनी चाहिए।