आंखों में काजल, कांधे पर नक्काशीदार गगरा, दुसुत्ती की गंजी और सफेद साफा बांधे यादवों का हुजूम जलाभिषेक के लिए निकला तो काफिला बढ़ता गया। लालजी यादव के नेतृत्व में दुर्गा सरदार हाथों में झंडा लेकर शोभायात्रा का नेतृत्व कर रहे थे। गौरीकेदारेश्वर से जलाभिषेक के बाद शोभायात्रा तिलभांडेश्वर महादेव, शीतला माता, अहिल्येश्वर महादेव, आल्हादेश्वर महादेव, ढुंढिराज गणेश होते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में पहुंचा।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में 21 यादवों को ही गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति थी लेकिन भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने 45 लोगों को जलाभिषेक के लिए प्रवेश कराया। हर-हर महादेव का जयघोष कर यादव बंधुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया और गर्भगृह से बाहर निकले।
वहीं कुछ यादव बंधु श्रद्धालुओं की कतार रोककर गर्भगृह में जलाभिषेक करना चाहते थे लेकिन भीड़ के कारण सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया तो वह नाराज होकर झांकी दर्शन कर चले गए। इसके बाद यादव बंधुओं का रेला महामृत्युंजय महादेव, त्रिलोचन महादेव में जलाभिषेक के बाद अंतिम पड़ाव लाटभैरव पहुंचा।
लाटभैरव के जलाभिषेक के साथ यात्रा संपन्न हुई। इस दौरान बाले यादव, विष्णु यादव, मनोज यादव, गोलू यादव, प्रभाकर यादव, शालिनी यादव, बत्ती सरदार, किशन यादव, बत्ती सरदार, आयुष्मान चंद्रवंशी समेत काफी संख्या में यादव समाज के लोगों ने जलाभिषेक किया।
चंद्रवंशी गोप सेवा समिति की शोभायात्रा में निकली शोभायात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। रास्ते भर शोभायात्रा के झंडे की पूजा के साथ ही आरती उतारी गई। रास्ते में जगह-जगह फलाहार का इंतजाम किया गया। लाटभैरव पर विनोद पहलवान ने फलाहार की व्यवस्था की गई थी।
मैदागिन पर गोपाल दास बाबा की याद में झंडे का पूजन व फलाहार वितरण किया गया। महामृत्युव महादेव फलाहार की व्यवस्था प्रभु यादव ने किया। दूधकटरा पर समिति के सहयोगी पहलवान भईयालाल यादव व उनके टीम ने साफा व लस्सी से स्वागत किया। त्रिलोचन महादेव मंदिर प्रांगण में अनिल यादव, गोलू सरदार, महेश यादव व उनके सहयोगियों ने फलाहार वितरित किया।
21 लोगों के जलाभिषेक का किया बहिष्कार, जताया विरोध
मंदिर प्रशासन की ओर से 21 लोगों को ही जलाभिषेक के लिए अनुमति दिए जाने का यादव समाज के कुछ लोगों ने विरोध किया। उन्होंने गोदौलिया पर हाथ में तख्ती लेकर पारंपरिक वेशभूषा में विरोध जताया।
विनय यादव ने कहा कि सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक की उनकी 92 सालों की परंपरा रही है। कुछ लोगों ने साजिश करके इसे खत्म करने का प्रयास किया है। हम लोग इसका विरोध करते हैं और जलाभिषेक का भी बहिष्कार करते हैं।