जालसाज ने खुद को डीआईजी बताकर ज्ञानवापी में तैनात एक इंस्पेक्टर को 45 हजार रुपये की चपत लगा दी। ठग ने डीआईजी के नाम पर ऐसी धौंस जमाई कि इंस्पेक्टर दहशत में आ गया। उसने किसी को बिना कोई जानकारी दिए जालसाज के बताए चार मोबाइल नंबरों पर करीब 45 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
बाद में जब इंस्पेक्टर को अपने ठगे जाने का अहसास हुआ तो उसने साथी पुलिस कर्मियों को इसकी जानकारी दी। फिर एसपी सुरक्षा को अवगत कराया। एसपी सुरक्षा ने डीआईजी को इसकी जानकारी दी। डीआईजी के फटकार लगाने के बाद जब उन मोबाइल नंबरों पर कॉल की गई तो वे आॅफ कर दिए गए थे। जिन मोबाइल एकाउंट में रुपये डलवाए गए हैं, वे सभी नंबर बिहार और झारखंड के हैं। अभी कुछ दिनों पहले भी डीआईजी के नाम की धौंस देकर ठगों ने एसओ लोहता को 30 हजार का चूना लगाया था।
ज्ञानवापी की सुरक्षा में तैनात इंस्पेक्टर वसीर अहमद खान के सीयूजी मोबाइल पर बुधवार की दोपहर में कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को डीआईजी बताते हुए एयरटेल के चार मोबाइल नंबरों पर प्रति मोबाइल 10-10 हजार रुपये डलवाने को कहा। इंस्पेक्टर ने इन नंबरों पर रुपये डलवा दिए। कुछ देर बाद दोबारा फोन आया। पांच-पांच हजार रुपये और डलवाने को कहा गया तो इंस्पेक्टर को शक हुआ। उसने नारायण कटरा के दूकानदार को फोन कर रुपये डलवाने को कह तो दिए लेकिन साथियों से भी इसकी चर्चा कर दी।
साथी पुलिस कर्मियों ने भी उसके ठगे जाने की आशंका जताई। इंस्पेक्टर ने एसपी सुरक्षा को पूरी घटना से अवगत कराया। इंस्पेक्टर की तहरीर पर चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस बारे में पूछे जाने पर इंस्पेक्टर वसीर अहमद ने कहा कि उनसे नासमझी हुई लेकिन उन्होंने संबंधित मोबाइल नंबरों को लॉक करा दिया है। बाद में ट्रांसफर कराए गए पांच हजार रुपये दूकानदार को नहीं देने के सवाल पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।