चौकाघाट पुलिस चौकी पर जुटी भीड़
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रविवार की सुबह परिजनों ने पुलिस के साथ सीसीटीवी कैमरों की फुटेज फिर खंगालनी शुरू कर दी। बुनकर मार्केट में लगे एक कैमरे की फुटेज में अबू इस्माइल एक युवक का हाथ पकड़ कर जाते दिखा। पुलिस ने उसका पता लगाया तो शिनाख्त नक्खीघाट के शाहिद जमाल के तौर पर हुई। पुलिस टीमों ने शाहिद जमाल को मुहल्ले से ही पकड़ लिया। शाहिद की निशानदेही पर ही अबू का शव दोपहर में बरामद किया गया। रात नौ बजे पोस्टमार्टम के बाद अबू का शव उसके परिजनों को सौंप दिया गया।
अपर पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने कहा कि बच्चे के बड़े भाई ने अपने दोस्तों के साथ अभियुक्त को पीटा था। इसे लेकर उसे मुहल्ले के बच्चे चिढ़ाते थे। बच्चे के बड़े भाई को सबक सिखाने के लिए अभियुक्त ने वारदात को अंजाम दिया है।
दोषीपुरा निवासी मासूम अबू इस्माइल शनिवार की रात हत्यारोपी शाहिद जमाल के चाचा की परचून की दुकान में बोरी में कैद रहा। यह बातें शाहिद जमाल ने पुलिस की पूछताछ में बताई। कहा कि वह अबू के बड़े भाई जियान से नफरत करता था और उसे सबक सिखाने की ठाना था। उस पता नहीं था कि वह अबू के साथ आते-जाते हुए सीसीटीवी कैमरों में कैद हो रहा है। अन्यथा की स्थिति में वह कभी पकड़ा नहीं जाता।
दोषीपुरा में शाहिद के चाचा की दुकान है। दुकान में अकसर शाहिद ही बैठता था। उसकी दुकान में अबू अपने बड़े भाई जियान के साथ आता था तो वह उसे टॉफी दे देता था। शाहिद ने बताया कि इसे लेकर मुहल्ले के लड़कों ने अबू के बड़े भाई से कहा कि मेरा चालचलन ठीक नहीं है और वह हमसे दूर रहा करे। इस पर अबू के बड़े भाई ने अपने दोस्तों के साथ उससे मारपीट की थी। मारपीट के बाद मुहल्ले के लड़के उसे रोजाना चिढ़ाते थे और कहते थे कि इतना बड़ा होकर बच्चों से मार खा गया। इसी वजह से वह जियान से खार खाया हुआ था।
शाहिद ने बताया कि शनिवार की रात वह अबू को देखा तो उसे लगा कि मौका अच्छा है। वह उसे टॉफी देने के बहाने अपने साथ अपनी दुकान पर ले गया। दुकान में अबू का मुंह कुछ देर तक दबाए रखा और फिर उसे एक बोरी में डाल कर रस्सी बांध दिया। रस्सी के ऊपर गत्ता वगैरह रख कर वह घर चला गया। रविवार की सुबह वह दुकान पर आया और अबू के शरीर में कोई हरकत न देख कर बोरी को थर्मोकोल के एक डिब्बे में डाल कर कूड़े के ढेर के पास रख आया।
अबू इस्माइल बीते शुक्रवार को बजरडीहा स्थित अपने नाना हाजी बशीर अहमद के घर गया था। उसी रात वह अपनी मां शीबा परवीन के साथ वापस अपने घर भी आ गया था। अबू इस्माइल का शव मिलने के बाद चौकाघाट पुलिस चौकी पर वह बार-बार यही कह रहे थे कि मेरे मासूम नाती ने आखिर उस हैवान का क्या बिगाड़ा था? नाती जैसा सुंदर बच्चा मेरे घर-परिवार में और कोई नहीं है।
हाजी बशीर अहमद ने कहा कि हमने शनिवार की रात 9:30 बजे के लगभग जैतपुरा थाने की पुलिस को अपने नाती के गायब होने के संबंध में लिखित सूचना दी थी। सूचना मिलने के साथ ही पुलिस सक्रियता दिखाती तो शायद बच्चा बच जाता। अब पुलिस से यही विनती है कि आरोपी को सजा-ए-मौत दिलाकर हमें और हमारी बेटी को न्याय दिलाए।
अबू इस्माइल के परिजन उसे शनिवार रात से ही खोज रहे थे। मां शीबा परवीन अपने कलेजे के टुकड़े की सलामती की दुआ कर रही थी। शीबा के भाई परवेज अख्तर ने बताया कि रविवार की दोपहर जैसे ही शीबा ने यह सुना कि भांजे की हत्या कर दी गई है तो वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी। होश में आते ही वह अबू इस्माइल का चेहरा दिखाने की जिद कर रही थी। बड़ी ही मुश्किल से बहन को परिवार की महिलाओं ने संभाला है।