संस्कृति विश्वविद्यालय में लोककलाओं के संरक्षण के साथ ही शोध की भी सुविधा होगी। डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स की रूपरेखा नई शिक्षा नीति को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही है। संस्कृति को व्यावसायिक पाठ्यक्रम से जोड़कर रोजगारपरक कोर्स व प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
इससे बनारस घराने के प्रशिक्षुओं को जहां संगीत के विश्व फलक पर छाने का मौका मिलेगा वहीं उनके हुनर को नया आयाम भी। विश्वविद्यालय में लोककलाओं को पुनर्जीवित करने के लिए बड़े आयोजन भी कराए जाएंगे जिससे कि लोककलाकारों की जीविका का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
धर्मार्थ कार्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि संस्कृति विश्वविद्यालय की रूपरेखा तैयार की जा रही है। भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय को संस्कृति विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाएगा और इसका कैंपस बनारस में भी खोला जाएगा।