वाराणसी। उद्योग व इकाईयों की स्थापना को लेकर भूमि में आ रही रुकावटों को भी रफ्तार मिल गया है। कृषि उपयोग भूमि को उद्योग के लिए परिवर्तन कराने में अब साल, दो साल तक उद्यमियों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उद्यमी कृषि योग्य भूमि पर तेजी से उद्योग इकाईयां आसानी से लग सकेंगी। सोमवार को प्रदेशस्तरीय उद्योग बंधु की हुई बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस फैसले से उद्यमियों में उत्साह है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि आवास व शहरी नियोजन विभाग औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए भू-उपयोग परिवर्तन के आवेदनों का निस्तारण 90 दिनों के अंदर में करेगा।
औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए भू-उपयोग परिवर्तन मामलों के आवेदन राजस्व विभाग में लंबित पड़े रहते हैं। परिवर्तन का आदेश उपजिलाधिकारी की ओर से दी जाती है लेकिन इसमें भी उद्यमियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। किसी-किसी की फ़ाइल दो से तीन साल तक उपजिलाधिकारी के यहां पड़ी ही रह जाती है। यही वजह है कि उद्योग स्थापना की चाह उद्यमी धीरे-धीरे छोड़ देते हैं। उद्यमियों के अनुसार अब राह काफी आसान हो गई है। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 90 दिन के अंदर भू-उपयोग परिवर्तन से जुडे मामले सुलझा लिया जाए।
वहीं यह भी राहत वाली बात है कि कृषि से औद्योगिक श्रेणी में भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क को घटाकर सर्किल रेट के 35 प्रतिशत के स्थान पर 20 प्रतिशत लिया जाएगा। जिला उद्योग व प्रोत्साहन केंद्र के सहायक उपायुक्त वीके वर्मा ने बताया कि कृषि भूमि को उद्योग के लिए परिवर्तन के आवेदनों का 90 दिनों के अंदर में किया जाएगा। इससे जनपद में उद्योग व इकाईयां तेजी से बढ़ेंगी।
यह बहुत बड़ी राहत उद्यमियों के लिए सरकार ने दी है। भूमि परिवर्तन में ही दो से तीन साल गुजर जाते थे। अब यह समस्या नहीं होगी।--देव भट्टाचार्या, अध्यक्ष, रामनगर औद्योगिक एसोसिएशन
उद्योग की स्थापना जितनी जल्दी होगी, रोजगार का सृजन भी उतना ही तेज होगा। उद्योग स्थापना को लेकर अब उद्यमियों को राजस्व विभाग का चक्कर नहीं काटना होगा।-पीयूष अग्रवाल, महामंत्री, औद्योगिक आस्थान, चांदपुर