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Railway: वंदेभारत में बैठने के साथ मिलेगी सोने की भी सुविधा, लगेंगे स्लीपर कोच, जानिए रेलमंत्री ने क्या कहा

Sat, 10 Dec 2022 05:34 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी दौरे पर पहुंचे रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को वाराणसी कैंट जंक्शन का निरीक्षण किया। पत्रकारों से बातचीत में बुलेट ट्रेन और वंदेभारत एक्सप्रेस से संबंधित सवालों के जवाब दिए। 
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वाराणसी कैंट जंक्शन के बाहर रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदेभारत एक्सप्रेस में अभी तक बैठ कर यात्रा होती है। क्योंकि इस ट्रेन में सिर्फ चेयर कार वाले कोच हैं, स्लीपर के नहीं। अब इसमें सो कर भी यात्रा हो सकेगी। वाराणसी दौरे पर पहुंचे रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि अब वंदेभारत एक्सप्रेस ट्रेन में स्लीपर कोच की भी सुविधा होगी। इसके लिए एक साल बाद काम शुरू हो जाएगा।

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इतना ही नहीं वंदेभारत ट्रेनों को लंबी दूरी के लिए भी चलाया जाएगा। मौजूदा समय सभी वंदेभारत ट्रेनें जिन स्टेशनों से चलती हैं, रात में उन्हीं स्टेशनों में वापस आ जाती है। लेकिन अब वंदेभारत को राजधानी की तरह चलाने की योजना है। जो दिन-रात चलेंगी। जिसमें लोग सोते हुए भी सफर कर सकेंगे।

देशभर में 400 वंदेभारत चलाने का लक्ष्य

दो दिवसीय (9-10) दौरे पर काशी आए रेलमंत्री ने शनिवार को कैंट रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया, फिर पत्रकारों से बात की। रेलमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे को 400 वंदेभारत ट्रेन चलाने का लक्ष्य दिया है। इस लक्ष्य को हासिल करना है। रेल प्रशासन तेजी से काम चल कर रहा है।

रोजाना चलेगी काशी-तमिल संगमम एक्सप्रेस

वाराणसी से बुलेट ट्रेन चलाने के सवाल पर रेल मंत्री ने कहा कि बुलेट ट्रेन चलाने की दिशा में अच्छा काम हुआ है। नई तकनीक सीख गए हैं। भारत में पहली बुलेट ट्रेन चलाने की प्रगति बहुत अच्छी है। जल्द ही नए कॉरिडोर पर काम होगा। रेलमंत्री ने काशी से तमिलनाडु के बीच काशी तमिल संगमम एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का एलान शुक्रवार को ही किया था, लेकिन शनिवार को एक और सुविधा देने की घोषणा कर दी।
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उन्होंने कहा कि काशी तमिल संगमम एक्सप्रेस ट्रेन रोजाना चलेगी। इसका संचालन जल्द ही होगा। धार्मिक व सांस्कृतिक नगरी में काशी-तमिल संगमम का आयोजन अद्भुत है। सांस्कृतिक विरासतें आपस में जुड़ रही हैं। काशी तमिल की पुरानी परंपराएं सुदृढ़ रूप से उभर रही हैं। 
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