भारत की संस्कृति और सभ्यता को सहेजने और संरक्षित करने के लिए काशी को केंद्र में रखकर नैमिषेय समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति की मुख्य मार्गदर्शक सुर साम्राज्ञी भारतरत्न लता मंगेशकर होंगी। मार्गदर्शक की भूमिका में पद्मविभूषण गिरिजा देवी और इसकी संयोजिका प्रख्यात नृत्यांगना सोनल मानसिंह होंगी। रविवार को यह जानकारी खुद सोनल मानसिंह ने दी।
उन्होेंने कहा कि एक समय था जब ज्ञान और परंपरा पूरब से पश्चिम जाती थी। संस्कृति का ह्रास हमें किसी भी कीमत नहीं होने देना है। उन्हाेंने कहा कि विश्व का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार नोबेल है। किसे पुरस्कार देना है, ये पश्चिम के लोग तय करते हैं। नोबल की तर्ज पर ही हमें भारत से नैमिषेय पुरस्कार की शुरुआत करनी चाहिए। यह पुरस्कार भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का होना चाहिए।
थिएटर कलाकार और अभिनेता राजीव वर्मा ने कहा कि कला और संस्कृति पूरब से पश्चिम तक गई है लेकिन आज हम इन सारी चीजों की अपेक्षा पश्चिम से करने लगे हैं। वक्त आ गया है कि इस पर विचार किया जाए कि हम अपना वो स्थान फिर से कैसे प्राप्त कर सकते हैं। ये नैमिषारण्य से ही संभव है। इसमें फिल्म, रंगमंच, गायन, वादन से जुड़ी शख्सियतें किस तरह अपनी भूमिका अदा करें, यह तय किया जाएगा।