सूबे के राज्यपाल राम नाईक ने गुरुवार को कहा कि भारत पांच साल में दुनिया का सबसे युवा देश होगा। जबकि चीन में बूढ़ों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने युवा भारत को आगे ले जाने का संकल्प दिलाया। वेदपाठी बटुकों, आचार्यों से कहा कि वह संस्कृति और संस्कृत भाषा का सूर्य रूपी प्रकाश इस तरह फैलाएं कि पूरा विश्व प्रकाशित हो उठे।
महमूरगंज स्थित शृंगेरी मठ में आयोजित चतुर्वेद पारायण एवं श्रीमद्भागवत गीता, वेद स्पर्धा के पुरस्कार वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल ने वेद की महिमा का बखान किया और गीता के संदेश के महत्व पर भी रोशनी डाली। सैकड़ों बटुकों के वेद अध्ययन को भी राज्यपाल ने परखा। उन्होंने गीता के कुछ श्लोकों की पहली पंक्ति पढ़ी तो बटुकों ने सामूहिक रूप से दूसरी पंक्ति दोहरा कर पूरा कर दिया।
संस्कृत के महत्व को उन्होंने लोक सभा के द्वार पर लिखे ‘वसुधैव कुटुंबकम...’ श्लोक के जरिए समझाया। कहा कि इसका अर्थ है कि जिसका चरित्र उज्ज्वल है उसके लिए पूरी दुनिया एक परिवार के समान है। इस संदेश के माध्यम से संस्कृत और भारतीय दर्शन की ताकत के साथ ही उसकी व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वेद दुनिया का सबसे पुराना जीवन दर्शन है। हजारों साल से वेद संस्कृति चली आ रही है। जब दुनिया में तमाम लोग लोग लिखना नहीं जानते थे, तब से हमारी वेद की ऋचाएं ऋषि-मुनियों की स्मरण शक्ति के आधार पर चर्चा में हैं। उन्होंने गीता में वर्णित कर्म की प्रधानता का अनुसरण करने का संदेश दिया। कहा कि कुछ लोग सवाल उठाते हैं कि महाभारत के दौरान युद्ध के मैदान में कृष्ण ने कैसे गीता का उपदेश दिया होगा।
शायद उनको पता नहीं है कि उस जमाने में जब सूरज डूब जाता था जब युद्ध नहीं होता था, अब तो अंधेरे में ही हमले किए जाते हैं। उन्होंने गीता के श्लोक-कर्मण्येवाधिकारश्य मा फलेषु कदाचन... का उदाहरण देते हुए कहा कि अर्जुन ने जब युद्ध करने से मना किया तब कृष्ण ने यही संदेश दिया था कि कर्म करना तुम्हारा अधिकार, करो। फल की चिंता मत करो। यहां लड़ना ही तुम्हारा धर्म है। पीछे हट जाओगे तो अपकीर्ति हो जाएगी, सज्जन व्यक्ति की अपकीर्ति मृत्यु से भी बढ़कर होती है।
उन्होंने कहा कि वेद और गीता के संदेशों का पालन किया गया होता तो देश बहुत आगे गया होता। उन्होंने भारतीय दर्शन की उपज योग के महत्व पर भी रोशनी डाली। कहा कि काशी तो संस्कृति का केंद्र है। यहां आकर मर जाने से मोक्ष मिलता है। अगर कहीं दूसरी जगह मृत्यु हो जाए और काशी का दो बूंद गंगा जल मुंह में डाल दिया जाए तब भी मुक्ति मिल जाती है। उन्होंने शृंगेरी मठ के वेद प्रचार के प्रयास को सराहा।