अटल सरकार में भाजपा के महासचिव रहे केएन गोविंदाचार्य इन दिनों अध्ययन प्रवास पर हैं। शुक्रवार को वह विंध्याचल पहुंचे। पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत को स्वदेशी विकास का रास्ता अपनाना चाहिए। अध्ययन प्रवास में वह देश की दशा और दिशा देख रहे हैं।
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एक सितंबर से शुरू हुए प्रवास का समापन दो अक्टूबर को होना है। उन्होंने कहा कि इन 20 साल में उन्होंने तीन काम किए। अवलोकन, विमर्श एवं क्रियान्वयन। उन्होंने कहा कि राजनीति में उनकी रुचि वर्ष 2000 में ही समाप्त हो गई थी।
वह भारत की असली ताकत प्रकृति, पर्यावरण और लोगों के मूल स्वभाव के लिए काम कर रहे हैं। केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत की घोषणा की है। उन्होंने इसकी सफलता की कामना की। कहा कि तकनीकी क्षेत्र पर अंकुश लगाने व जवाबदेही की जरूरत है। इसके लिए लोकपाल सरीखी व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह जमीन, जंगल व जन की बात करते हैं। किसी भी देश का विकास प्रकृति के अनुकूल होता है। वर्तमान राजनीति पर कहा कि किसी भी स्थिति के लिए नेता के साथ-साथ समाज भी बराबर की जवाबदेह होती है।