तभी गांव की आशा उसके पास आई और परिवार के सदस्यों को सलाह दी कि वो लोग मरीज को लेकर कोपागंज बाजार के दोस्तपुरा मोहल्ले में मौजूद एक निजी अस्पताल में ले चलें। आशा की बातों में आकर परिवार के सदस्य निजी अस्पताल पहुंचे। पति का आरोप है कि निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने उसका अल्ट्रासाउंड किया।
इस दौरान रिपोर्ट बेहतर बताई। प्रसव कराने की बात बोलकर मरीज को भर्ती कर लिए। भर्ती होने के करीब एक घंटे बाद सुमन ने बच्चे को जन्म दिया। डिलिवरी होने के कुछ देर बाद नवजात की मौत हो गई। परिवार के सदस्यों का आरोप है कि अस्पताल के कर्मचारियों ने नवजात को रात में ही नदी में फेंक दिया।
इतना ही नहीं डाक्टरों ने प्रसूता की बच्चेदानी फटने की बात बताकर उसका ऑपरेशन कर निकाल दिया। परिवार के सदस्यों के अनुसार, अस्पताल में हुए इस खेल की जानकारी उन लोगों को शुक्रवार की सुबह हुई। इस दौरान परिवार के सदस्य आक्रोशित होकर अस्पताल पहुंचे। परिवार के सदस्य अभी डॉक्टर से बात करते कि अस्पताल की तरफ से शुल्क जमा कराने का फरमान जारी कर दिया गया।
शुल्क न जमा करने की दशा में मरीज को वापस घर ले जाने की बात कही। इतने में नाराज परिवार के सदस्यों का गुस्सा फूट पड़ा। परिवार के सदस्यों ने अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामा की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने पहले प्रसुता को जिला महिला अस्पताल भेजवाया।